Stock Market : विदेशी निवेशकों (Foreign Institutional Investors) के तीन महीने तक शेयर बाजार से दूरी बनाने के बाद, अक्टूबर में भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक लौट आई है। सेंसेक्स ने इस महीने 4,159 अंकों की शानदार उछाल के साथ 5 फीसदी की बढ़त हासिल की है। इस तेजी का सबसे बड़ा कारण है विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का नाटकीय यू-टर्न, जिन्होंने 7,300 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है।
बेंचमार्क इंडेक्स अब अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (85,978) से सिर्फ 1,552 अंक और निफ्टी अपने रिकॉर्ड से मात्र 410 अंक पीछे है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में शेयर बाजार सितंबर 2024 के शिखर को पार कर सकता है। लगातार पांच कारोबारी सत्रों की तेजी ने निवेशकों में उत्साह भरा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह दिवाली की चमक शेयर बाजार (Stock Market) को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी या यह सिर्फ एक अस्थायी उछाल है? आइए, इसे समझने की कोशिश करते हैं।
तेजी के पीछे क्या है कारण?
ओम्नीसाइंस कैपिटल के सीईओ और मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. विकास गुप्ता ने एक प्रमुख अखबार को बताया कि भारत ने नकारात्मक माहौल का सबसे बुरा दौर देख लिया है। उनका कहना है कि संवत 2082 में शेयर बाजार (Stock Market) उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करेगा। इसके कई कारण हैं।
वैश्विक स्तर पर युद्धों (Global Wars) में कमी की संभावना है, भारत सहित कई देशों में ब्याज दरों (Interest Rates) में कटौती हो सकती है, और टैरिफ वॉर भी कम होने की उम्मीद है। इस महीने निफ्टी बैंक में 6 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखी गई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 3-4 फीसदी की मामूली बढ़त हुई। यह दिखाता है कि बड़े शेयर और संस्थागत पसंदीदा स्टॉक्स में तेजी का रुझान है, लेकिन व्यापक बाजार अभी सतर्क है।
आय में सुधार की उम्मीद
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार का कहना है कि शेयर बाजार (Stock Market) में तेजी न आने का मुख्य कारण कंपनियों की आय में कमी है। वित्त वर्ष 2025 में केवल 5 फीसदी की वृद्धि देखी गई, जो पिछले तीन सालों के औसत 24 फीसदी से काफी कम है। लेकिन त्योहारी सीजन में ऑटोमोबाइल और व्हाइट गुड्स की बिक्री में उछाल से उम्मीद जगी है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में आय वृद्धि (Income Growth) 8-10 फीसदी और वित्त वर्ष 2027 में 15 फीसदी तक पहुंच सकती है। विजयकुमार कहते हैं कि लंबे समय में बाजार आय का गुलाम होता है, इसलिए भविष्य का रुझान इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियों की आय कैसी रहती है।
शेयर बाजार कितना ऊपर जा सकता है?
वेंचुरा सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर का कहना है कि संवत 2082 में निफ्टी 27,600 और सेंसेक्स 90,100 अंकों तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा स्तर से शानदार वृद्धि होगी। उनका मानना है कि वित्त वर्ष 2025 की कमजोर आय प्रवृत्ति अब अपने निचले स्तर पर है, जो संवत 2082 के लिए सकारात्मक संकेत है।
घरेलू खपत में सुधार, संभावित अमेरिका-भारत व्यापार समझौता (US-India Trade Agreement), और ब्याज दरों में कटौती (Interest Rate Cuts) के साथ सरकारी पूंजीगत व्यय (Government Capex) जैसे कारक इस तेजी को बढ़ावा दे सकते हैं। निफ्टी वर्तमान में कैलेंडर वर्ष 2026 के 18 गुना के एडवांस पी/ई पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके लंबे समय के औसत 17 गुना से थोड़ा ऊपर है। यह संकेत देता है कि बाजार में गिरावट की संभावना कम है।
विदेशी निवेशकों की शानदार वापसी
पिछले तीन महीनों में 76,600 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचने के बाद, विदेशी निवेशक (Foreign Institutional Investors) अक्टूबर में 7,300 करोड़ रुपये के निवेश के साथ शुद्ध खरीदार बन गए हैं। भारत के प्रति एफआईआई का अंडरवेट रुख 2009 के बाद सबसे ज्यादा है। एल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट के क्वांट हेड आलोक अग्रवाल का कहना है कि आय में सुधार के साथ यह अंडरवेट रुख विदेशी निवेशकों को वापसी के लिए प्रेरित कर सकता है।
हाल की स्थिरता और निफ्टी ईपीएस में 1 फीसदी की मामूली वृद्धि से संकेत मिलता है कि आय अपने निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। उपभोग में सुधार के कारण वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में तेजी की उम्मीद है।
ओम्नीसाइंस कैपिटल के गुप्ता बैंक, बिजली, ईपीसी, इंफ्रा, और फाइनेंस सेक्टर पर सकारात्मक हैं, क्योंकि ये अपने आंतरिक मूल्य से कम पर ट्रेड कर रहे हैं। उनका मानना है कि डिफेंस और रेलवे सेक्टर को संवत 2082 में निर्यात प्रोत्साहन और सरकारी आवंटन (Government Schemes) से और बढ़ावा मिलेगा।









