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UDAN Scheme : आ गया सस्ते हवाई सफर का नया दौर, अब छोटे शहरों से उड़ान होगी आसान

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UDAN Scheme : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘उड़े देश का आम नागरिक’ यानी UDAN Scheme अब एक नए दौर में कदम रखने जा रही है। यह योजना, जिसने छोटे शहरों और दूर-दराज के इलाकों को हवाई नक्शे पर लाने का कमाल किया, अब और बड़े पैमाने पर काम करेगी।

सरकार इसे और आक्रामक तरीके से लागू करने की तैयारी में है, लेकिन इसके लिए पैसों की कमी आड़े आ रही है। अब सरकार अपने बजट से सीधे फंडिंग (Budgetary Support) जैसे नए रास्तों पर विचार कर रही है, ताकि आम आदमी का हवाई सफर और सस्ता, और आसान हो सके।

सरकार का क्या है मेगा प्लान?

सरकार का लक्ष्य अगले 10 साल में 120 नए शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ना है। इतना ही नहीं, इस बार हेलीकॉप्टर और सी-प्लेन जैसी सेवाएं भी UDAN Scheme का हिस्सा बनेंगी। जाहिर है, इतने बड़े लक्ष्य के लिए भारी-भरकम फंडिंग की जरूरत होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हम UDAN Scheme को और तेजी से बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा फंडिंग सिस्टम इसे पूरा करने के लिए काफी नहीं है। इसलिए, हम नए तरीकों की तलाश में हैं।”

UDAN Scheme के तहत छोटे शहरों के रूट्स पर आधी सीटों का किराया सीमित (कैप्ड) रखा जाता है, ताकि आम लोग भी हवाई यात्रा कर सकें। लेकिन कम किराए और कम यात्रियों की वजह से ये रूट्स एयरलाइंस के लिए मुनाफे का सौदा नहीं होते।

इस घाटे की भरपाई के लिए सरकार एयरलाइंस को सब्सिडी (Subsidy) देती है, जिसमें लैंडिंग और नेविगेशन चार्ज में छूट भी शामिल है। अब जब योजना का दायरा बढ़ रहा है, तो सब्सिडी का बोझ भी बढ़ेगा, और इसके लिए मौजूदा फंडिंग काफी नहीं होगी।

क्यों पीछे हट रही हैं बड़ी एयरलाइंस?

फिलहाल, UDAN Scheme का 80% पैसा देश की दूसरी कमर्शियल उड़ानों पर लगने वाले 6,500 रुपये के शुल्क (लेवी) से आता है। बाकी 20% हिस्सा राज्य सरकारें देती हैं। लेकिन सरकार इस शुल्क को बढ़ाकर यात्रियों पर बोझ नहीं डालना चाहती। साल 2022 में सरकार ने इस लेवी को 15,000 रुपये करने की कोशिश की थी, लेकिन इंडिगो और एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइंस ने इसका जोरदार विरोध किया।

उनका कहना था कि इससे मुख्य रूट्स की टिकटें महंगी हो जाएंगी, जिसका असर यात्रियों पर पड़ेगा। ये एयरलाइंस UDAN Scheme को क्रॉस-सब्सिडी देने के मूड में नहीं हैं।

एक अन्य अधिकारी ने कहा, “हम UDAN Scheme का विस्तार करना चाहते हैं, लेकिन लेवी बढ़ाकर यात्रियों पर बोझ नहीं डालना चाहते। इसलिए, हमारा एक प्रस्ताव है कि योजना को सीधे बजटीय समर्थन (Budgetary Support) दिया जाए।” इसका मतलब है कि पैसा सरकार के खजाने से आएगा, न कि यात्रियों से शुल्क के रूप में।

क्या बढ़ेगी सब्सिडी की मियाद?

फंडिंग के अलावा, सरकार UDAN Scheme के एक और अहम हिस्से पर विचार कर रही है, और वो है सब्सिडी की अवधि। अभी नियम है कि UDAN Scheme में रूट जीतने वाली एयरलाइन को उस रूट पर तीन साल तक कोई प्रतिस्पर्धा नहीं मिलेगी और सब्सिडी भी मिलेगी। साथ ही, उन्हें चार महीने के भीतर उड़ानें शुरू करनी होती हैं।

लेकिन समीक्षा में एक बड़ी समस्या सामने आई। खासकर छोटी एयरलाइंस, जो दूर-दराज के इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने में अहम हैं, कई बार समय पर उड़ानें शुरू नहीं कर पातीं। कारण? या तो उनके पास विमान नहीं होते, या एयरपोर्ट पूरी तरह तैयार नहीं होता।

इससे उन्हें भारी नुकसान होता है। इसलिए, सरकार सब्सिडी की तीन साल की अवधि को बढ़ाने पर विचार कर रही है, ताकि इन एयरलाइंस को स्थिर होने का ज्यादा समय मिले। जाहिर है, अगर सब्सिडी की अवधि बढ़ेगी, तो फंडिंग की जरूरत भी बढ़ेगी।

अब तक कैसा रहा UDAN का सफर?

2016 में शुरू हुई UDAN Scheme का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। सरकार ने अब तक एयरलाइंस को 4,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी (Subsidy) दी है और हवाई अड्डों के विकास व अपग्रेडेशन पर 4,638 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। लेकिन यह भी सच है कि योजना के तहत शुरू किए गए 649 रूट्स में से केवल 60% ही अभी चल रहे हैं।

फिर भी, क्षेत्रीय एयरलाइंस का मानना है कि UDAN Scheme क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए गेम-चेंजर है। स्टार एयर के सीईओ सिमरन सिंह टिवाना कहते हैं, “क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी प्रगति का इंजन है।” जब कोई नई उड़ान किसी छोटे शहर से शुरू होती है, तो स्थानीय व्यवसायों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिलती है। इससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है, और स्वास्थ्य, शिक्षा और लोगों की जिंदगी की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

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