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Home Mandir Vastu : वास्तु के अनुसार पूजा घर की दिशा और मूर्तियों के नियम, जो बदल देंगे आपकी किस्मत

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Home Mandir Vastu : घर में पूजा स्थल का होना हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति लाता है। अक्सर यह सवाल मन में उठता है कि मंदिर कहाँ बने, उसमें कौन-सी मूर्तियाँ रखें और किन बातों का ध्यान रखें।

पूजा का महत्व

ईश्वर का स्मरण केवल नाम जप से भी किया जा सकता है, लेकिन विधि-विधान से पूजा करने का आनंद ही अलग होता है।

सनातन धर्म में पंचदेव— गणेशजी, दुर्गा माता, सूर्यदेव, शिवजी और श्रीविष्णु— की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इनके साथ कुलदेवता और कुलदेवी की आराधना भी शुभ मानी जाती है।

पूजा स्थल की सही दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मंदिर पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। शौचालय या बाथरूम से सटा हुआ मंदिर नहीं होना चाहिए।

शयनकक्ष (बेडरूम) में मंदिर बनाना भी उचित नहीं है।

मूर्तियों से जुड़े नियम

घर में एक ही मूर्ति रखने के बजाय अनेक देवताओं की मूर्तियों की पूजा करना शुभ है।

  • दो शालिग्राम
  • दो शिवलिंग
  • तीन गणेश मूर्ति
  • दो शंख
  • दो सूर्य मूर्ति
  • तीन दुर्गा मूर्ति
  • दो गोमती चक्र

घर में रखना अशुभ माना जाता है। इससे परिवार में कलह और मानसिक अशांति बढ़ सकती है।

मूर्तियों का चयन

मूर्ति हमेशा पत्थर, काष्ठ (लकड़ी), सोना या धातु की होनी चाहिए। यदि मूर्ति रखना संभव न हो, तो देवी-देवताओं के सुंदर चित्र भी पूजनीय माने जाते हैं।

पूजा की दिनचर्या

भगवान की मूर्तियाँ केवल सजावट के लिए नहीं होतीं।

उन्हें रोज़ साफ़ करें

ताजे फूल, मौसमी फल, गुड़, बताशा या शक्कर का भोग लगाएं

श्रद्धा और भक्ति के साथ नित्य पूजा करें

जितना आप मूर्तियों का आदर करेंगे, उतना ही घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।

गीता में श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि अपने स्वाभाविक कर्मों द्वारा परमेश्वर की आराधना करने से मनुष्य को परम सिद्धि प्राप्त होती है।

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