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Health Tips : हाई बीपी में घबराहट हो रही है, 10 मिनट करें ये प्राणायाम, तुरंत मिलेगा सुकून

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Health Tips : आजकल की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में तनाव, चिंता और हाई ब्लड प्रेशर (High BP) सिर्फ उम्रदराज़ लोगों की समस्या नहीं रह गई है।

कम उम्र के युवाओं में भी हाइपरटेंशन, घबराहट, बेचैनी, नींद न आना और मानसिक तनाव आम बात बनती जा रही है। हाई बीपी बढ़ने पर दिल की धड़कन तेज महसूस होना, अचानक से पैनिक जैसा फील होना या शरीर में गर्माहट बढ़ जाना कई लोगों के साथ होता है।

ऐसे में चंद्र नाड़ी प्राणायाम (Chandra Nadi Pranayama) एक बेहद सरल, सुरक्षित और प्रभावी योगिक तकनीक है, जो मन को तुरंत शांत करती है और ब्लड प्रेशर को सामान्य स्तर पर लाने में मदद करती है।

योग विशेषज्ञों और कई अध्ययनों के अनुसार, यह प्राणायाम शरीर में कूलिंग इफेक्ट लाता है, जिससे दिमाग और नसों को आराम मिलता है।

चंद्र नाड़ी प्राणायाम क्या होता है?

प्राणायाम में दो मुख्य नाड़ियां मानी जाती हैं — चंद्र (इडा) और सूर्य (पिंगला)। चंद्र नाड़ी शरीर में ठंडक, शांति और स्थिरता लाती है।

यह लेफ्ट नॉस्ट्रिल यानी बाईं नाक से जुड़ी होती है। जब आप बाईं नासिका से धीमी और गहरी सांस लेते हैं, तो यह दिमाग को कूलिंग सिग्नल भेजती है, जिससे स्ट्रेस हार्मोन कम होते हैं और मन शांत होने लगता है।

हाई बीपी में क्यों फ़ायदेमंद है चंद्र नाड़ी प्राणायाम?

  • ब्लड प्रेशर को कम करने में सहयोगी
  • दिल की धड़कन को सामान्य करने में सहायक
  • दिमाग, नसों और मस्तिष्क पर शांति का प्रभाव
  • चिंता, घबराहट और बेचैनी में आराम
  • नींद में सुधार और माइंड रिलैक्सेशन

कई योग विशेषज्ञ मानते हैं कि हाई बीपी की स्थिति में 10–15 मिनट तक सिर्फ बाईं नासिका से श्वास लेने पर बीपी स्थिर होने लगता है और व्यक्ति ज्यादा रिलैक्स महसूस करता है।

यह प्राणायाम प्राकृतिक रूप से शरीर को शांत करता है और तुरंत राहत देने वाला योग अभ्यास माना जाता है।

कैसे करें चंद्र नाड़ी प्राणायाम? 

  • किसी शांत जगह पर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएँ।
  • रीढ़ सीधी रखें और आँखें बंद कर लें।
  • दाहिने हाथ से नाक के दाहिने छिद्र (राइट नॉस्ट्रिल) को अंगूठे से बंद करें।
  • अब बाईं नासिका से धीरे-धीरे गहरी सांस अंदर लें।
  • कुछ सेकंड रोककर फिर उसी बाईं नासिका से सांस छोड़ें।
  • इस प्रक्रिया को शुरुआत में 5 मिनट और धीरे-धीरे 10–15 मिनट तक करें।
  • नियमित अभ्यास से मन, शरीर और सांस के बीच संतुलन विकसित होता है।

बेहतर परिणाम के लिए इन बातों का ध्यान रखें

  • सुबह खाली पेट या शाम को करें
  • शुरुआत में कम समय से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं
  • सांस बहुत तेज़ नहीं, हमेशा धीमी और नियंत्रित लें
  • हाई बीपी मरीज दाईं नासिका से सांस लेने से बचें
  • अनुलोम-विलोम का नियमित अभ्यास भी चंद्र नाड़ी को सक्रिय करने में मदद करता है।

अगर हाई बीपी, स्ट्रेस, पैनिक या घबराहट की समस्या बार-बार महसूस हो रही है, तो दवाइयों के साथ-साथ चंद्र नाड़ी प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बेहद लाभकारी हो सकता है।

यह एक प्राकृतिक, बिना किसी साइड इफेक्ट वाला योग अभ्यास है, जो मन को स्थिर, शांत और रिलैक्स करता है।

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