Income Tax Notice : दिल्ली में एक करदाता ने अपने बैंक अकाउंट में 8.68 लाख रुपये जमा किए। बस यहीं से शुरू हुई मुसीबत। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) ने नोटिस थमा दिया। मामला इतना बढ़ा कि 6 साल पुरानी जांच पूरी टैक्स जंग बन गई।
लेकिन आखिरकार आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने 22 सितंबर 2025 को बड़ा फैसला सुनाया और कर विभाग की कार्रवाई को खारिज कर दिया। ये केस बताता है कि बैंक अकाउंट में बड़ी रकम जमा करना कितना रिस्की हो सकता है।
परेशानी कैसे शुरू हुई?
करदाता ने बैंक अकाउंट में 8.68 लाख रुपये कैश जमा किए। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) को ये लेनदेन संदिग्ध लगा। शुरू में इसे “लिमिटेड स्क्रूटनी” माना गया, यानी सिर्फ कैश के सोर्स की जांच। लेकिन असेसिंग ऑफिसर ने इसे आगे बढ़ाया और सेक्शन 44AD (Section 44AD) के तहत प्रिजम्प्टिव बिजनेस इनकम मान लिया। मतलब, ये रकम को बिजनेस प्रॉफिट समझकर टैक्स लगाने की कोशिश।
करदाता ने पहले CIT (Appeals) में अपील की, लेकिन हार गए। फिर ITAT (Income Tax Appellate Tribunal) गए और जीत हासिल की। ट्रिब्यूनल ने कहा कि लिमिटेड स्क्रूटनी को ऐसे विस्तार देना गैरकानूनी है।
क्या बैंक जमा पर टैक्स लगता है?
बैंक अकाउंट में कैश जमा करने पर सीधे टैक्स नहीं लगता, लेकिन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) की नजर हमेशा रहती है। बैंक को नियम है कि अगर कोई व्यक्ति एक फाइनेंशियल ईयर में 10 लाख रुपये या इससे ज्यादा कैश जमा करता है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) को रिपोर्ट करनी पड़ती है।
ये लिमिट PAN से लिंक सभी अकाउंट्स पर मिलाकर लागू होती है। असामान्य कैश डिपॉजिट पर नोटिस आ सकता है। विभाग सोर्स चेक करता है और आपको जवाब देना पड़ता है।
नोटिस से कैसे बचें?
बैंक अकाउंट में कैश डिपॉजिट लिमिट के अंदर रखें। अगर बड़ी रकम जमा कर रहे हैं, तो सोर्स प्रूफ जैसे डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें। नोटिस आए तो तुरंत जवाब दें, वरना कानूनी झंझट बढ़ सकता है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) की निगरानी से बचने के लिए ट्रांसपेरेंट रहें।









