---Advertisement---

FII DII stake reduction : FII और DII ने घटाई हिस्सेदारी, इन 5 कंपनियों पर निवेशकों की नजर

---Advertisement---

FII DII stake reduction : भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में दो बड़े निवेशक वर्ग हमेशा सुर्खियों में छाए रहते हैं। पहला तो FII (Foreign Institutional Investors) और दूसरा DII (Domestic Institutional Investors)। ये दोनों ही बाजार की दिशा तय करने और निवेशकों के मूड को झकझोरने में माहिर हैं। जब FII (Foreign Institutional Investors) किसी सेक्टर या कंपनी में पैसा लगाते हैं, तो लगता है कि विदेशी भरोसा बढ़ रहा है।

वहीं DII (Domestic Institutional Investors) का बढ़ता निवेश घरेलू खिलाड़ियों की दिलचस्पी दिखाता है। लेकिन कई बार इनका निवेश पैटर्न किसी कंपनी के असली दम या आने वाले दिनों की ताकत को पूरी तरह नहीं बताता। हाल ही में ऐसी कुछ कंपनियां नजर आई हैं, जहां FII (Foreign Institutional Investors) और DII (Domestic Institutional Investors) दोनों ने अपनी हिस्सेदारी घटा दी।

आइए, इन पांच कंपनियों पर एक नजर डालते हैं, जहां FII-DII की बिकवाली ने सबको चौंका दिया है।

CDSL: डीमैट किंग पर ब्रेक लगाने वाले निवेशक

CDSL यानी Central Depository Services Limited, भारत की टॉप मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में शुमार है। ये कंपनी निवेशकों को शेयर, बॉन्ड और म्यूचुअल फंड जैसी सिक्योरिटीज को इलेक्ट्रॉनिक या डीमैट फॉर्म में रखने की आसान सुविधा देती है।

सितंबर 2025 तिमाही में FII (Foreign Institutional Investors) ने CDSL में अपनी होल्डिंग 12.90 फीसदी से घटाकर 11.54 फीसदी कर दी, मतलब करीब 1.36 फीसदी की गिरावट। वहीं DII (Domestic Institutional Investors) की होल्डिंग भी 14.24 फीसदी से सिमटकर 14.18 फीसदी रह गई।

अवधि
FII होल्डिंग
DII होल्डिंग
जून 2025
12.90%
14.24%
सितंबर 2025
11.54%
14.18%

फिर भी कंपनी को भरोसा है कि भारत में डिमैट अकाउंट्स की तेज रफ्तार, IPO की बाढ़ और रिटेल निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी उसके बिजनेस को आने वाले दिनों में और पावरफुल बनाएगी। FII (Foreign Institutional Investors) और DII (Domestic Institutional Investors) की ये चाल क्या बाजार के बड़े बदलाव का संकेत है?

Sterling and Wilson Renewable Energy: सोलर चैंपियन पर क्यों ठंडा पड़ा रुझान?

Sterling and Wilson Renewable Energy भारत की लीडिंग इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनियों में से एक है। ये कंपनी बड़े-बड़े सोलर, हाइब्रिड और बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर हाथ आजमाती है और दुनिया की टॉप सोलर EPC कंपनियों में गिनी जाती है।

सितंबर 2025 तिमाही में FII (Foreign Institutional Investors) ने यहां होल्डिंग 8.41 फीसदी से घटाकर 7.11 फीसदी की, जबकि DII (Domestic Institutional Investors) की हिस्सेदारी 5.02 फीसदी से सिकुड़कर 3.18 फीसदी रह गई। यानी FII ने 1.3 फीसदी और DII ने 1.84 फीसदी की कटौती की।

अवधि
FII होल्डिंग
DII होल्डिंग
जून 2025
8.41%
5.02%
सितंबर 2025
7.11%
3.18%

कंपनी के पास अभी 25 गीगावाट से ज्यादा की बोली पाइपलाइन है और ये भारत के अलावा अफ्रीका व यूरोप में नए मौके तलाश रही है। वर्तमान में 92.87 बिलियन वैल्यू के अनएक्जीक्यूटेड ऑर्डर हैं, जो आने वाले सालों में कमाई को स्थिर रखेंगे।

Sterling and Wilson डिजिटल ऑटोमेशन और स्टोरेज टेक्नोलॉजी में पैसा लगाकर अपनी ताकत बढ़ा रही है। लेकिन FII (Foreign Institutional Investors) और DII (Domestic Institutional Investors) की बिकवाली से सवाल उठ रहे हैं कि क्या रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कुछ गड़बड़ है?

Balrampur Chini Mills: शुगर से आगे का सफर, फिर भी निवेशक सतर्क

Balrampur Chini Mills भारत की टॉप शुगर कंपनियों में शानदार जगह रखती है। ये सिर्फ शुगर बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि इथेनॉल, बिजली प्रोडक्शन और डिस्टिलरी बिजनेस में भी धूम मचाती है। सितंबर 2025 में FII (Foreign Institutional Investors) की होल्डिंग 11.99 फीसदी से घटकर 11.20 फीसदी हो गई, तो DII (Domestic Institutional Investors) की 28.02 फीसदी से सिमटकर 27.59 फीसदी रह गई। मतलब FII में 0.79 फीसदी और DII में 0.43 फीसदी की कमी।

अवधि
FII होल्डिंग
DII होल्डिंग
जून 2025
11.99%
28.02%
सितंबर 2025
11.20%
27.59%

अब कंपनी अपने इतिहास के सबसे बड़े प्रोजेक्ट पर कदम रखने वाली है – पॉली लैक्टिक एसिड (PLA) पॉलिमर बिजनेस। नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट 2026 के आखिर तक चालू हो सकती है, जो लंबे समय की ग्रोथ के नए दरवाजे खोलेगी। FII (Foreign Institutional Investors) और DII (Domestic Institutional Investors) की ये सतर्कता क्या कंपनी के ब्राइट फ्यूचर को नजरअंदाज कर रही है?

Marksans Pharma: फार्मा की OTC स्टार पर ब्रेक क्यों?

Marksans Pharma भारत की एक बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनी है, जो ओवर-द-काउंटर (OTC) और प्रिस्क्रिप्शन ड्रग्स दोनों में सक्रिय है। इसके प्रोडक्ट्स कार्डियोलॉजी, डायबिटीज, ऑन्कोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जैसी मेडिकल कैटेगरीज में इस्तेमाल होते हैं। सितंबर 2025 में FII (Foreign Institutional Investors) ने होल्डिंग 19.89 फीसदी से घटाकर 16.92 फीसदी की, जबकि DII (Domestic Institutional Investors) की 5.50 फीसदी से 5.28 फीसदी रह गई। यानी FII ने 2.97 फीसदी और DII ने 0.22 फीसदी कटौती की।

अवधि
FII होल्डिंग
DII होल्डिंग
जून 2025
19.89%
5.50%
सितंबर 2025
16.92%
5.28%

कंपनी अब OTC बिजनेस को दोगुना करने और अमेरिका, ब्रिटेन व यूरोप में मजबूत पकड़ बनाने पर जोर दे रही है। ग्लोबल OTC मार्केट 2025 तक 204 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। लेकिन FII (Foreign Institutional Investors) और DII (Domestic Institutional Investors) की होल्डिंग कटौती से फार्मा सेक्टर में अनिश्चितता बढ़ रही है।

Sula Vineyards: वाइन क्वीन पर ठंडा रिस्पॉन्स, क्या त्योहारों में उछाल?

भारत की नंबर वन वाइन मेकर सुला वाइनयार्ड्स के पास महाराष्ट्र और कर्नाटक में 2,800 एकड़ से ज्यादा वाइनयार्ड नेटवर्क है। कंपनी सालाना एक मिलियन से ऊपर वाइन केस प्रोड्यूस और डिस्ट्रीब्यूट करती है। सितंबर 2025 में FII (Foreign Institutional Investors) की होल्डिंग 6.68 फीसदी से घटकर 4.45 फीसदी हो गई, तो DII (Domestic Institutional Investors) की 18.25 फीसदी से 18.01 फीसदी रह गई। मतलब FII में 2.23 फीसदी और DII में 0.24 फीसदी की गिरावट।

अवधि
FII होल्डिंग
DII होल्डिंग
जून 2025
6.68%
18.25%
सितंबर 2025
4.45%
18.01%

कंपनी FY26 के लिए वाइन टूरिज्म को बढ़ाने की प्लानिंग कर रही है। इसमें गुजरात बॉर्डर के पास नया Dindori Tasting Room, नासिक के Domaine Sula में नया टेस्टिंग रूम व रेस्तरां, और 30 रूम्स वाला नया रिसॉर्ट शामिल है। त्योहारी सीजन में इससे बिक्री और ब्रांड वैल्यू दोनों चमक सकती हैं। FII (Foreign Institutional Investors) और DII (Domestic Institutional Investors) की ये चाल क्या वाइन इंडस्ट्री के उज्ज्वल भविष्य को चुनौती दे रही है?

Join WhatsApp

Join Now
---Advertisement---

Leave a Comment