Bihar Election 2025 : बिहार में दशकों से राजनीति जाति के इर्द-गिर्द घूमती आई है। यहाँ बड़ी जातियाँ तो हैं ही, लेकिन कुशवाहा, मल्लाह, माँझी जैसी छोटी जातियाँ भी अपने अलग-अलग नेता लेकर स्वतंत्र ताकत बन जाती हैं।
मगर इस नियम का सबसे बड़ा अपवाद हैं खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार! पिछले 20 सालों में नीतीश ने खुद को सिर्फ़ कुर्मी नेता (जो बिहार की आबादी का महज़ 3% से भी कम है) तक सीमित नहीं रखा।
उन्होंने एक ऐसा जबरदस्त जातीय गठबंधन बना लिया जो पूरी तरह उनके अपने व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द घूमता है। यही उनकी असली ताकत है, क्योंकि बाकी बड़े नेता आज भी अपनी-अपनी जाति तक सिमटे नजर आते हैं।
तेजस्वी यादव से चिराग पासवान तक, सब जाति के ढांचे में
आरजेडी के तेजस्वी यादव को तो सब यादवों का नेता मानते हैं। चिराग पासवान (LJP-RV) दुसाध समुदाय के चहेते हैं। भाजपा में गिरिराज सिंह भूमिहारों के और सम्राट चौधरी कुशवाहा समुदाय के बड़े चेहरा हैं। मगर नीतीश? वो इन सबके ऊपर उठकर खेल रहे हैं!
नीतीश का अचूक EBC फॉर्मूला
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कुर्मी होने की वजह से नीतीश को जाति के मोर्चे पर हमेशा बड़ी चुनौती मिलती रही है। फिर भी उनका ‘ठोस पिछड़ा वोट’ खासकर अति-पिछड़ा वर्ग (EBC) में आज भी पत्थर की लकीर बना हुआ है। पटना से लेकर उत्तर-पूर्व के सीमांचल तक का सफर करें तो यह वफादारी साफ़ दिखती है। बाढ़, सिकंदरा, कटिहार में लोग खुलकर कहते हैं, “जो हमको सड़क दिया, बिजली दिया, सुरक्षा दिया, उसको नहीं वोट देंगे तो किसको देंगे?”
दलित से मंडल तक, सब बोल रहे – “नीतीश बाबू ही चाहिए”
धनुख समुदाय के अलावा पासवान, माँझी जैसे दलित समुदाय के लोग भी नीतीश के साथ खड़े हैं, भले उनके अपने नेता चिराग पासवान और जीतन राम माँझी NDA में हों। मंडल समुदाय के कई लोग तो साफ़ कह रहे हैं – “स्थानीय उम्मीदवार नहीं, नीतीश बाबू के लिए वोट डालेंगे!”
नीतीश ने EBC को कैसे बनाया अपना सबसे बड़ा किला?
मुख्यमंत्री बनते ही नीतीश ने EBC को मज़बूत करने के बड़े-बड़े कदम उठाए:
- 2006 में पंचायतों-जिला परिषदों में EBC को 20% आरक्षण दिया।
- 2010 में 10 लाख तक की मदद वाली नई उद्यमिता योजना शुरू की।
- 2023 में बिहार जाति सर्वेक्षण कराया, जिसमें EBC की आबादी 36% निकली।
- लेकिन जमुई में थोड़ी ‘नीतीश थकान’ भी दिखी!
हालाँकि जमुई जैसे कुछ इलाकों में कहार (चंद्रवंशी) समुदाय में नीतीश थकान के संकेत मिले। एक ई-रिक्शा मालिक ने BPSC उम्मीदवारों पर लाठीचार्ज का ज़िक्र करते हुए कहा, “अब तेजस्वी को मौका दो।” यहाँ मुस्लिम-यादव वोट के साथ-साथ दूसरे वर्गों का समर्थन मिलने से RJD के शमशाद आलम को BJP की श्रेयसी सिंह पर बढ़त मिल सकती है।









