Cyber Crime : गुरुग्राम में साइबर क्राइम पुलिस ने एक हैरान करने वाला मामला सुलझाया है, जिसमें एक महिला ने अपने पति को फंसाने के लिए फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर खुद को और अपने पति को जान से मारने की धमकियां भेजीं। इस महिला की पहचान प्रिया मिश्रा के रूप में हुई है, जो गुरुग्राम के सोहना इलाके की एक आवासीय सोसाइटी में रहती है। यह सनसनीखेज खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की और सच सामने लाया।
फर्जी धमकियों का खेल
यह पूरा मामला तब सामने आया, जब 29 मई को प्रिया मिश्रा ने साइबर क्राइम साउथ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने दावा किया था कि एक महिला के इंस्टाग्राम अकाउंट से उन्हें और उनके पति को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। जांच के लिए सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर क्राइम) प्रियांशु दीवान की देखरेख में इंस्पेक्टर नवीन कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
तकनीकी सबूतों ने खोला राज
जांच के दौरान पुलिस को कई अहम तकनीकी सबूत मिले, जिन्होंने इस मामले को नया मोड़ दे दिया। जब पुलिस ने प्रिया मिश्रा से गहन पूछताछ की, तो उन्होंने आखिरकार सच उगल दिया। प्रिया ने कबूल किया कि उन्होंने ही वह फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था। उन्होंने बताया कि अपने पति के साथ चल रहे वैवाहिक तनाव के कारण उन्होंने यह साजिश रची, ताकि उनके पति को फंसाया जा सके और उनके खिलाफ मामला दर्ज हो।
पुलिस ने उस मोबाइल फोन को भी बरामद कर लिया, जिससे ये धमकियां भेजी जा रही थीं। पुलिस प्रवक्ता ने बताया, “महिला ने जानबूझकर धमकियां भेजीं और फिर खुद ही शिकायत दर्ज कराई। हमारी जांच में सारा सच सामने आ गया।”
वैवाहिक तनाव का खतरनाक रूप
यह मामला न केवल साइबर क्राइम की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वैवाहिक तनाव कभी-कभी लोग कितने खतरनाक कदम उठा सकते हैं। इस घटना ने समाज में चर्चा का विषय बना दिया है कि रिश्तों में तनाव को हल करने के लिए लोग किस हद तक जा सकते हैं।
गुरुग्राम पुलिस की साइबर क्राइम पर कड़ी नजर
गुरुग्राम साइबर क्राइम पुलिस इस तरह के अपराधों पर लगातार नजर रख रही है। जनवरी से मई 2025 के बीच पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े 52 लोगों को गिरफ्तार किया और एक नाबालिग को हिरासत में लिया। इन मामलों में कुल ₹61.65 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी सामने आई। इन अपराधों में सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए ठगी, सेक्सटॉर्शन, इन्वेस्टमेंट स्कैम, फर्जी अफसर बनकर ठगी और FedEx जैसे फर्जीवाड़े शामिल थे। पुलिस ने इन अभियानों में 26 मोबाइल फोन, 5 लैपटॉप, 3 सिम कार्ड, एक एटीएम कार्ड, एक चेकबुक और ₹15.36 लाख नकद बरामद किए हैं।
साइबर अपराध का बढ़ता दायरा
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की जांच से पता चला है कि साइबर अपराध अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा राष्ट्रीय स्तर पर फैल चुका है। यह मामला इस बात का सबूत है कि साइबर क्राइम से निपटने के लिए पुलिस को और भी सतर्क और तकनीकी रूप से मजबूत होने की जरूरत है।









