Operation Sindoor : लोकसभा में सोमवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा शुरू होने से पहले ही विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा मचाया। नारेबाजी और प्रदर्शन के बीच विपक्षी सदस्य वेल में उतर आए, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सख्त रुख अपनाना पड़ा। उन्होंने विपक्ष को कड़ी चेतावनी दी और नियमों का पालन करने की नसीहत दी।
“तरीका ठीक रखिए, ये सदन है!”
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जैसे ही स्पीकर ओम बिरला ने आसन संभाला, विपक्षी सांसद अपनी सीटें छोड़कर वेल में आ गए। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा की मांग को लेकर वे शोर-शराबा करने लगे। इस पर स्पीकर ने साफ-साफ कहा, “तरीका ठीक रखिए, ये सदन है। क्या आप ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा करना चाहते हैं? अगर हां, तो अपनी सीट पर जाएं। वेल में नारेबाजी से कोई चर्चा नहीं होगी। सदन में नियम और प्रक्रिया का पालन होता है। चर्चा का फैसला बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में लिया जाता है।”
1 बजे तक स्थगित हुई कार्यवाही
विपक्षी सांसदों ने स्पीकर की चेतावनी को नजरअंदाज किया और वेल में डटे रहे। लगातार नारेबाजी और हंगामे के बीच स्पीकर ने सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालात बेकाबू होते देख ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 1 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का क्या है माजरा?
‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक गुप्त सैन्य अभियान का कोडनेम है, जिसे सेना ने हाल ही में सीमा पार अंजाम दिया। इस अभियान को लेकर देशभर में चर्चाएं तेज हैं। विपक्ष सरकार से इस ऑपरेशन के तथ्यों, निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर जवाब मांग रहा है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला है और इसे राजनीतिक रंग देना ठीक नहीं।
विपक्ष क्यों है नाराज?
विपक्ष का आरोप है कि सरकार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। उनका कहना है कि सैनिकों के बलिदान को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। विपक्ष चाहता है कि इस मुद्दे पर लोकसभा में खुलकर चर्चा हो और रक्षा मंत्रालय को जवाबदेह बनाया जाए।








