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Old Pension Scheme : राजस्थान-पंजाब जैसे 5 राज्यों में OPS लागू, अब अन्य राज्यों की बारी

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Old Pension Scheme : 2025 में पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को लेकर कुछ ऐसा होने वाला है, जो लाखों सरकारी कर्मचारियों के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है! देश के कोने-कोने में कर्मचारी सालों से पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) की वापसी की गुहार लगा रहे हैं।

अभी तक राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश – ये 5 राज्य पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को दोबारा लागू कर चुके हैं। लेकिन अब केंद्र सरकार पर पूरे देश में इसे लागू करने का प्रेशर जबरदस्त बढ़ रहा है। 2025 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले यह मुद्दा राजनीति की आग में घी डालने वाला साबित हो रहा है।

पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) का सबसे बड़ा फायदा ये है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को आखिरी सैलरी का 50% पेंशन के तौर पर मिलता है, जो नई पेंशन योजना (NPS) से कहीं ज्यादा सुरक्षित और पक्की कमाई का जरिया है।

पुरानी पेंशन योजना क्या है?

पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) एक ऐसी सरकारी पेंशन सिस्टम है, जिसमें रिटायर होने के बाद कर्मचारी को उसके सर्विस ईयर्स और लास्ट सैलरी के हिसाब से गारंटीड पेंशन मिलती है। ये योजना 2004 से पहले जॉइन करने वाले कर्मचारियों पर लागू थी। मगर 1 जनवरी 2004 के बाद केंद्र सरकार ने नई पेंशन योजना (NPS) शुरू कर दी, जिसमें पेंशन मार्केट पर निर्भर हो गई और कोई गारंटी नहीं बची।

पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) में सरकार पेंशन की पूरी जिम्मेदारी उठाती है, जबकि नई पेंशन योजना (NPS) में कर्मचारी अपने कंट्रीब्यूशन के मुताबिक पेंशन पाते हैं। इसी वजह से कर्मचारी फिर से पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) की वापसी चाहते हैं, ताकि बुढ़ापे में पक्की आर्थिक सुरक्षा मिले।

किन राज्यों में लागू है OPS?

अभी भारत के 5 राज्यों – राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश – ने पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को दोबारा शुरू कर दिया है। इन राज्यों की सरकारों ने अपने कर्मचारियों के फायदे के लिए ये बड़ा कदम उठाया है। पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) लागू करने वाले राज्यों का मानना है कि ये कर्मचारियों को बेहतर सोशल सिक्योरिटी देती है और उनका फ्यूचर स्थिर बनाती है।

हालांकि, कुछ इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इससे राज्यों पर फाइनेंशियल लोड बढ़ सकता है। फिर भी, कर्मचारी यूनियंस इसे इतिहासिक फैसला बता रही हैं और अब बाकी राज्यों में भी पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) लागू करने की डिमांड जोर पकड़ रही है।

केंद्र सरकार की भूमिका और रुख

केंद्र सरकार का स्टैंड अभी पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) पर क्लियर नहीं है। फाइनेंस मिनिस्ट्री बार-बार कह चुकी है कि पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) इकोनॉमिकली सस्टेनेबल नहीं है। उनका कहना है कि इससे राज्यों के बजट पर भारी बोझ पड़ेगा और लॉन्ग टर्म में फाइनेंशियल डिसिप्लिन खराब होगा।

वहीं, केंद्र नई पेंशन योजना (NPS) को ज्यादा ट्रांसपेरेंट और मार्केट-ओरिएंटेड मानता है। मगर 2025 के पॉलिटिकल माहौल को देखते हुए ये इश्यू केंद्र के लिए बड़ा हेडेक बन गया है। अगर कर्मचारी संगठनों का प्रेशर और बढ़ा, तो सरकार को पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) पर दोबारा सोचना पड़ सकता है।

2025 में पूरे देश पर इसका असर

2025 में पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) से जुड़ी ये डिबेट नेशनल लेवल पर जबरदस्त इंपैक्ट डाल सकती है। कई राज्य सरकारें कर्मचारियों के वोट बैंक को ध्यान में रखकर पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) बहाल कर सकती हैं। केंद्र के लिए ये चुनावी स्ट्रैटेजी का अहम पार्ट बन सकता है।

अगर पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) पूरे देश में लागू हो गई, तो करोड़ों कर्मचारियों को डायरेक्ट बेनिफिट मिलेगा और उनकी इकोनॉमिक स्टेबिलिटी बढ़ेगी। दूसरी तरफ, सरकारी खर्च में भारी इजाफा हो सकता है, जिसे हैंडल करना मुश्किल होगा। इसलिए 2025 में पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) सिर्फ इकोनॉमिक इश्यू नहीं रहेगी, बल्कि पॉलिटिकल और सोशल लेवल पर भी देश के फ्यूचर को शेप देगी।

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