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Burning Feet Syndrome : तलवों में जलन सिर्फ गर्मी नहीं, शरीर के ये संकेत भी हो सकते हैं वजह

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Burning Feet Syndrome : गर्मी के मौसम में पैरों में हल्की जलन होना आम बात है, लेकिन अगर यह तकलीफ़ मौसम बदलने के बाद भी बनी रहे, खासकर रात के समय बढ़ जाए, तो इसे हल्के में लेना गलत हो सकता है।

लगातार जलन, चुभन या सुन्नता कई बार किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है। यही स्थिति आगे चलकर बर्निंग फीट सिंड्रोम के रूप में सामने आती है। आइए इसे गहराई से समझते हैं—इसके लक्षण, सम्भावित कारण और राहत के आसान तरीके।

बर्निंग फीट सिंड्रोम क्या है?

जब पैरों के तलवों में लगातार गर्माहट, जलन, चुभन, भारीपन या सुन्नता महसूस होती रहे, तो इसे बर्निंग फीट सिंड्रोम (BFS) कहा जाता है। इस स्थिति में पैरों में ऐसा लगता है जैसे तलवे भीतर से गर्म हो रहे हों।

कई लोग बताते हैं कि रात होते-होते जलन और दर्द और ज्यादा बढ़ जाता है।
बुज़ुर्गों में यह समस्या अधिक देखी जाती है, लेकिन गलत जीवनशैली, शुगर, या पोषण की कमी के कारण युवा भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

कैसे दिखते हैं इसके लक्षण?

पैरों में होने वाली हल्की गर्मी और बर्निंग फीट की जलन में बड़ा फर्क होता है। इस समस्या में आमतौर पर ये परेशानियाँ महसूस होती हैं—

  • तलवों में लगातार जलन या चुभन जैसा अहसास
  • पैरों में भारीपन या सुन्नता महसूस होना
  • रात के समय जलन और दर्द का बढ़ जाना
  • तलवों का लाल दिखाई देना या बहुत गर्म महसूस होना

अगर ये लक्षण रोज दिखाई दें, तो यह आपके शरीर में कुछ गड़बड़ होने का संकेत हो सकता है।

पैरों के तलवों में जलन क्यों होती है?

अब बात करते हैं उन कारणों की, जो अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं लेकिन पैरों की इस समस्या के मुख्य कारण बनते हैं।

डायबिटिक न्यूरोपैथी

अगर आपको डायबिटीज है, तो पैरों में जलन का सबसे बड़ा कारण नर्व डैमेज भी हो सकता है। लगातार बढ़ी हुई ब्लड शुगर नसों को कमजोर करती है, जिससे पैरों में झुनझुनी, सुन्नता और जलन जैसे लक्षण महसूस होते हैं। टाइप-1 और टाइप-2 दोनों डायबिटीज में यह समस्या आम है।

विटामिन-B की कमी

विटामिन B12, B6 और फोलेट की कमी भी पैरों की नसों पर असर डाल सकती है। जब शरीर पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता, तो नसें कमजोर होने लगती हैं और तलवे बार-बार गर्म महसूस होते हैं।

यह समस्या उन लोगों में भी ज्यादा देखी जाती है, जो असंतुलित डाइट लेते हैं या लंबे समय तक एंटी-एसिड दवाइयाँ खाते हैं।

फंगल इन्फेक्शन

एथलीट फुट या टिनिया पेडिस भी पैरों में जलन का छिपा हुआ कारण हो सकता है। यह संक्रमण पैरों की त्वचा को लाल, खुजलीदार और गर्म बनाता है।

अगर पैरों में अक्सर पसीना आता है या लंबे समय तक जूते पहने रहते हैं, तो यह संक्रमण तेज़ी से फैल सकता है।

मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोनल बदलाव

महिलाओं में मेनोपॉज़ के समय शरीर का तापमान अक्सर अनियंत्रित हो जाता है। हार्मोन बदलने से पैरों में असामान्य गर्माहट महसूस हो सकती है, जो रात में बढ़ जाती है। यह समस्या अस्थायी होती है लेकिन काफी परेशान करने वाली हो सकती है।

5. गर्भावस्था में शरीर का तापमान बढ़ना
प्रेग्नेंसी के दौरान प्रोजेस्टेरोन और रिलैक्सिन हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे रक्त प्रवाह बदलता है और शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है।

इसी वजह से कई महिलाएं पैरों में गर्मी या जलन महसूस करती हैं। यह स्थिति सामान्य है और डिलीवरी के बाद अक्सर अपने-आप ठीक हो जाती है।

पैरों की गर्मी कैसे कम करें? घरेलू और आसान उपाय

लगातार जलन की समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी है, लेकिन घर पर कुछ आसान तरीके राहत देने में मदद कर सकते हैं।

ठंडे पानी का उपयोग

पैरों को 10–15 मिनट तक ठंडे पानी में डुबोकर रखना तुरंत आराम दे सकता है। अगर जलन ज्यादा हो, तो यह तरीका दिन में दो बार अपनाया जा सकता है।

विटामिन की कमी पूरी करें

अगर विटामिन-B की कमी से परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर सलाह के अनुसार सप्लीमेंट्स देना शुरू कर सकते हैं। साथ ही, आहार में दूध, अंडा, दही, दालें और हरी सब्जियाँ शामिल करना भी बहुत फायदेमंद होता है।

सही निदान बेहद जरूरी

अगर जलन कई दिनों तक लगातार बनी रहती है या रात में बहुत बढ़ जाती है, तो इसे अनदेखा न करें। यह डायबिटिक न्यूरोपैथी, संक्रमण या किसी गंभीर बीमारी का भी संकेत हो सकता है।

समय रहते टेस्ट करवाना और सही इलाज शुरू करना पैर की नसों को और बिगड़ने से बचा सकता है।

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