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8th Pay Commission की ToR से 69 लाख पेंशनर बाहर! अब संसद में होगा हंगामा

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8th Pay Commission : केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बुरी खबर है। 8th Pay Commission की Terms of Reference (ToR) को लेकर भयंकर बवाल मच गया है।

कर्मचारी संगठनों और ट्रेड यूनियनों का सीधा आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर करीब 69 लाख पेंशनरों को 8th Pay Commission के दायरे से बाहर कर दिया है। इतना ही नहीं, ToR में यह भी नहीं लिखा गया है कि नई सिफारिशें कब से लागू होंगी। इससे कर्मचारियों में जबरदस्त गुस्सा है।

कई बड़े यूनियनों ने तो खुली चेतावनी दे डाली है कि अगर सरकार ने एकतरफा तरीके से 8th Pay Commission बनाया तो सड़कों पर उतरेंगे। फिलहाल सरकार इस पूरे मामले पर पूरी तरह चुप है।

1 दिसंबर से शुरू हो रहा संसद का शीतकालीन सत्र, सबकी नजरें टिकीं

अब सभी की निगाहें 1 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र पर लगी हैं। उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 8th Pay Commission और उसके ToR को लेकर सरकार का स्टैंड साफ करेंगी। पिछले सत्रों की तरह इस बार भी सांसदों के कई सवाल दागे जाएंगे, लेकिन इस बार सबसे बड़ा मुद्दा 8th Pay Commission की ToR में खामियां और पेंशनरों को बाहर करना होगा।

इसके अलावा पुरानी पेंशन स्कीम (OPS), महंगाई भत्ता (DA), महंगाई राहत (DR) और रिटायरमेंट बेनिफिट्स जैसे मुद्दे भी जोर-शोर से उठाए जाएंगे। 8th Pay Commission गठन और DA मर्जर पर सांसदों ने मांगा लिखित जवाब

सांसद आनंद भदौरिया ने तो सीधे दो बड़े सवाल पूछ डाले हैं –

  • 8th Pay Commission कब बनेगा?
  • महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक पे में मर्ज करने का फैसला कब तक?

लोकसभा और राज्यसभा पोर्टल पर पहले से ही सैकड़ों ऐसे सवाल अपलोड हो चुके हैं। अभी 7th Pay Commission लागू है, जो 1 जनवरी 2016 से चालू है। हर 10 साल में नया पे कमीशन आता रहा है, इसलिए 2026 में 8th Pay Commission लागू होना तय माना जा रहा है। करीब 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि सरकार 8th Pay Commission के ToR विवाद पर क्या कहती है।

यूनियनों का गंभीर आरोप – 69 लाख पेंशनरों को किया बाहर

यूनियनों का कहना है कि सरकार ने ToR में शब्दों की बाजीगरी करके 69 लाख पेंशनरों को 8th Pay Commission से बाहर कर दिया। दूसरा सबसे बड़ा विवाद DA और DR को बेसिक पे में मर्ज करने का है।

कर्मचारियों का तर्क है कि पिछले 30 साल में DA महंगाई की रफ्तार के साथ नहीं चल पाया। अभी DA 50% से ज्यादा हो चुका है और पहले नियम था कि 50% होते ही DA मर्ज हो जाता था। DA मर्जर से तुरंत सैलरी-पेंशन बढ़ती है और दूसरे भत्ते भी अपने आप बढ़ जाते हैं।

ToR में बदलाव की जोरदार मांग, नहीं तो देशव्यापी आंदोलन

पिछले कुछ हफ्तों में यूनियनों ने अपना विरोध और तेज कर दिया है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो पूरे देश में बड़ा आंदोलन होगा। उनकी मुख्य मांगें हैं:

  • NPS और UPS खत्म करके सभी के लिए पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) बहाल हो
  • फिटमेंट फैक्टर बढ़ाया जाए
  • DA 50% होते ही ऑटोमैटिक DA मर्जर हो
  • पे मैट्रिक्स ठीक किया जाए ताकि प्रमोशन न रुकें
  • पेंशनरों के साथ भेदभाव बंद हो
  • दया भर्ती की 5% लिमिट हटे
  • खाली पद भरे जाएं, आउटसोर्सिंग बंद हो
  • यूनियनों की मान्यता वापस दी जाए
  • संविदा कर्मचारियों को स्थायी किया जाए
  • पुराने मध्यस्थता अवार्ड लागू हों

यूनियनों का साफ कहना है कि अगर समय रहते 8th Pay Commission की ToR में सुधार नहीं हुआ तो यह आयोग भी पुरानी गलतियां दोहराएगा और कर्मचारियों-पेंशनरों को फिर नुकसान होगा।

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