Upcoming IPO : भारतीय शेयर बाज़ार इस समय अपने सबसे शानदार दौर से गुज़र रहा है। साल के आखिरि महीने दिसंबर और नए साल का पहला महीना जनवरी मिलाकर करीब दो दर्जन कंपनियां अपना आईपीओ लेकर आने वाली हैं।
मर्चेंट बैंकर्स के मुताबिक इन इश्यूज़ से बाज़ार में 40,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा ताज़ा पूंजी आएगी। यह रकम सीधे कंपनियों के विस्तार, कर्ज़ चुकाने और नए प्रोजेक्ट्स में लगेगी – यानी अर्थव्यवस्था को नया ऑक्सीजन मिलेगा।कौन-कौन सी बड़ी कंपनियां ला रही हैं IPO?इस लिस्ट में कई चर्चित नाम हैं:
- ICICI प्रूडेंशियल AMC (देश की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनियों में से एक)
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो
- रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी जुनिपर ग्रीन एनर्जी
- AI बेस्ड एनालिटिक्स कंपनी फ्रैक्टल एनालिटिक्स
- स्लीप और होम सॉल्यूशंस ब्रांड वेकफिट
- सिक्योरिटी सॉल्यूशंस कंपनी इनोवेटिवव्यू
- हॉस्पिटल चेन पार्क मेडी वर्ल्ड
बड़ी, मध्यम और छोटी – हर साइज़ की कंपनियां इस बार लाइन में हैं। इससे साफ़ है कि हर सेक्टर के बिज़नेस को अब पब्लिक फंडिंग पर भरोसा हो रहा है।2025 अब तक का सबसे धमाकेदार IPO साल बनने की राह परइस साल (जनवरी से नवंबर तक) 96 कंपनियां पहले ही लिस्ट हो चुकी हैं और उन्होंने कुल 1.60 लाख करोड़ रुपये जुटा लिए।
पिछले तीन महीने तो और भी शानदार रहे – 40 से ज़्यादा IPO सिर्फ़ सितंबर-नवंबर में आए।2024 में पूरे साल में 91 IPO से 1.6 लाख करोड़ आए थे। अब दिसंबर-जनवरी के 40,000 करोड़ जोड़ दें तो 2025 का आंकड़ा 2 लाख करोड़ के पार पहुँच सकता है।
अगर ऐसा हुआ तो यह भारतीय प्राइमरी मार्केट का नया रिकॉर्ड होगा!विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?आनंद राठी के हेड (प्रेफर्ड क्लाइंट ग्रुप) थॉमस स्टीफन बोले, “दिसंबर में अभी बाकी है और जनवरी भी भरा पड़ा है। 2 लाख करोड़ का आंकड़ा आसानी से पार हो सकता है।”
मेवेनार्क के को-फाउंडर शांतनु अवस्थी कहते हैं, “पहले कई अच्छी कंपनियां IPO से डरती थीं। अब समझ आ गया है कि तेज़ ग्रोथ के लिए बड़ी पूंजी चाहिए। प्राइवेट इक्विटी या वेंचर कैपिटल से बार-बार फंड जुटाना मुश्किल होता है, जबकि IPO से एक बार में बड़ी रकम और लंबे समय के लिए स्थिरता मिलती है।”निवेशकों के लिए यह क्यों मायने रखता है?
- लिस्टिंग के दिन ज्यादातर IPO अच्छा प्रीमियम दे रहे हैं (इस साल औसत लिस्टिंग गेन 25-30% रहा)
- लंबी अवधि में कई कंपनियां अपने बिज़नेस को 3-5 गुना बढ़ाने की योजना बना रही हैं
- खुदरा निवेशकों की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर है – HNI और संस्थागत निवेशक भी भारी दांव लगा रहे हैं
- अर्थव्यवस्था में नया पैसा आएगा → रोज़गार बढ़ेगा → खपत बढ़ेगी → शेयर बाज़ार को और सपोर्ट मिलेगा









