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उत्तराखंड में मोदी की बीमा योजनाओं से 154 करोड़ की मदद, हजारों परिवारों को मिली नई जिंदगी

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देहरादून : पहाड़ों में जिंदगी हमेशा थोड़ी जोखिम भरी रही है। एक पल की दुर्घटना या अप्रत्याशित मौत पूरे परिवार को आर्थिक संकट में धकेल देती है। लेकिन पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार की दो छोटी-सी बीमा योजनाओं ने उत्तराखंड के लाखों लोगों को मजबूत सुरक्षा कवच दिया है।

ये हैं प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना। संसद में हाल ही में मिले आधिकारिक जवाब से पता चला है कि सिर्फ उत्तराखंड में ही इन दोनों योजनाओं से अब तक 154.74 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता पीड़ित परिवारों तक पहुंच चुकी है।

ये योजनाएं क्यों हैं इतनी खास?

कल्पना कीजिए, सिर्फ 436 रुपये सालाना देकर 2 लाख का जीवन बीमा और महज 20 रुपये सालाना में 2 लाख का दुर्घटना बीमा! ये दोनों योजनाएं 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू की थीं, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के लोग भी बिना बोझ के बीमा करा सकें। बैंक खाते से ऑटो-डेबिट सुविधा की वजह से प्रीमियम खुद-ब-खुद कट जाता है, इसलिए लाखों लोग बिना सोचे इनसे जुड़ गए। उत्तराखंड जैसे राज्य में जहां सड़क हादसे और प्राकृतिक आपदाएं ज्यादा होती हैं, ये योजनाएं वरदान साबित हो रही हैं।

कितनी मदद मिली उत्तराखंड को?

  • ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 नवंबर 2025 तक
  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत उत्तराखंड में 6,606 दावे स्वीकृत हुए और 132.12 करोड़ रुपये दिए गए।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 1,131 दावों पर 22.62 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई।

कुल मिलाकर 154.74 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता सीधे जरूरतमंद परिवारों के खाते में पहुंची। कई परिवारों ने बताया कि यह राशि उनके लिए संकट के समय संजीवनी बनी।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब जनवरी 2026 तक पूरा होगा

उत्तराखंड के विकास की दूसरी बड़ी खबर दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से जुड़ी है। 210 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे दिल्ली से देहरादून की दूरी महज ढाई घंटे में पूरी कर देगा। अभी यह परियोजना अपने अंतिम चरण में है।

सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि पूरा प्रोजेक्ट लगभग तैयार है, सिर्फ अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक 70 मीटर सर्विस रोड का छोटा-सा हिस्सा एक कोर्ट केस की वजह से अटका हुआ है। इस छोटी रुकावट के बावजूद पूरी परियोजना की नई डेडलाइन जनवरी 2026 रखी गई है।

इस एक्सप्रेसवे से क्या फायदा होगा?

  • यात्रा का समय आधा हो जाएगा
  • पर्यटन को भारी बूस्ट मिलेगा
  • माल ढुलाई सस्ती और तेज होगी
  • ईंधन की बचत से प्रदूषण भी कम होगा
  • गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी

ये दोनों खबरें बताती हैं कि केंद्र सरकार की योजनाएं और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट उत्तराखंड के आम आदमी के जीवन में कितना गहरा असर डाल रहे हैं। एक तरफ आर्थिक सुरक्षा का मजबूत जाल, दूसरी तरफ तेज रफ्तार विकास यही उत्तराखंड का नया भविष्य बन रहा है।

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