ऋषिकेश में अतिक्रमण हटाने को लेकर हुए बवाल के बीच वन मंत्री सुबोध उनियाल ने साफ कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश हर हाल में लागू होंगे. प्रशासन ने विरोध और पत्थरबाजी के बाद सख्ती बढ़ा दी है, जबकि स्थानीय लोगों में अपनी छत छिनने का डर बना
ऋषिकेश : बुलडोजर और पत्थरबाजी के बीच सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है. वन मंत्री सुबोध उनियाल ने दो टूक कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश हर हाल में लागू होंगे. प्रशासन को मिल रही कड़ी चुनौती और स्थानीय लोगों के गुस्से के बावजूद सरकार ने संकेत दे दिए हैं कि वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान नहीं रुकेगा.
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि
वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार न्यायालय के प्रति पूरी तरह जवाबदेह है और वन भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराना अब अनिवार्यता बन गई है. मंत्री ने यह भी जोड़ा कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में होगी. जिनके पास जमीन के वैध दस्तावेज हैं, उनके साथ अन्याय नहीं होगा, लेकिन अवैध कब्जों को हर हाल में हटाया जाएगा.
पत्थरबाजी और 100 लोगों पर मुकदमा
पिछले दिनों ऋषिकेश में हालात उस वक्त बेकाबू हो गए थे जब वन विभाग और जिला प्रशासन की टीम जमीन की पैमाइश के लिए पहुंची. टीम को देखते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि विरोध प्रदर्शन पत्थरबाजी में बदल गया और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को चोटें आईं. पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए तुरंत एक्शन लिया और कुछ गिरफ्तारियों के साथ-साथ 100 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं.
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दशकों पुरानी कॉलोनियों पर संकट
यह पूरा विवाद उस लीज की जमीन को लेकर है, जहां बीते कई सालों में पक्की कॉलोनियां बस चुकी हैं. यहां रहने वाले परिवार सालों से निवासरत हैं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी जमीन को अतिक्रमण की श्रेणी में रखा जा रहा है. वन विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम फिलहाल यह तय करने के लिए नपाई कर रही है कि कितनी जमीन वास्तव में वन विभाग की है. इस प्रक्रिया के दौरान भी लोगों का विरोध लगातार जारी है.
चुनावी साल में सरकार की अग्निपरीक्षा
आगामी चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा सियासी रूप भी ले चुका है. विपक्ष इसे सरकार द्वारा लोगों को उजाड़ने की साजिश बता रहा है, जबकि सत्ताधारी भाजपा के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश है, तो दूसरी तरफ स्थानीय जनता का आक्रोश. विरोध के चलते लोगों ने रेल और सड़क यातायात भी बाधित किया था. फिलहाल प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर रखा है.









