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Kedarnath Helicopter Crash : मशीन नहीं, मौसम ने दिया धोखा – केदारनाथ में 7 जान लेने वाले हादसे का सच आया सामने

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केदारनाथ घाटी में जून 2025 में हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे पर एएआईबी की शुरुआती जांच रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, गौरीकुंड के पास हुए इस एक्सीडेंट की वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि घाटी के निकास पर अचानक आए घने बादल थे, जिससे दृश्यता खत्म हो गई थी।

Kedarnath Helicopter Crash : केदारनाथ धाम के पास जून 2025 में हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर क्रैश की वजह अब साफ हो गई है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी है।

जांच में सामने आया है कि आर्यन एविएशन द्वारा संचालित ‘बेल 407’ हेलीकॉप्टर किसी मशीनी खराबी का शिकार नहीं हुआ था, बल्कि घाटी से बाहर निकलते वक्त खराब मौसम ने उसे घेर लिया था। गौरीकुंड के पास हुए इस हादसे में पायलट और 6 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

सुबह 5:20 तक सब ठीक था

एएआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, उस दिन सुबह की शुरुआत सामान्य थी। हेलीकॉप्टर ने गुप्तकाशी से सुबह करीब 5:10 बजे पहली उड़ान भरी और 5:20 बजे केदारनाथ हेलीपैड पर सुरक्षित लैंडिंग की।

वहां से छह तीर्थयात्रियों को लेकर पायलट ने वापसी की उड़ान भरी। उड़ान भरने से पहले सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। सीसीटीवी फुटेज की जांच और पायलट का ‘ब्रीथ एनालाइजर’ टेस्ट भी हुआ था, जिसमें सब कुछ सामान्य पाया गया।

एग्जिट पॉइंट पर बादलों का जाल

पहाड़ों में मौसम पलक झपकते ही बदलता है और यही इस हादसे की मुख्य वजह बनी। नियमों के अनुसार, केदारनाथ घाटी से निकलते समय हेलीकॉप्टर्स को 9,000 फीट की ऊंचाई बनाए रखनी होती है। रिपोर्ट बताती है कि पायलट इसी तय ऊंचाई पर उड़ रहा था।

जैसे ही हेलीकॉप्टर घाटी के निकास बिंदु (Exit Point) के करीब पहुंचा, वहां पहले से मौजूद घने बादलों ने दृश्यता (Visibility) को बेहद कम कर दिया। पायलट को संभलने का मौका नहीं मिला और कम दृश्यता के चलते हेलीकॉप्टर गौरीकुंड के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

शुरुआती जांच में इंजन या मशीनरी में किसी भी तरह की असामान्यता या खराबी की बात सामने नहीं आई है।

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