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CM Dhami Report Card : साढ़े 4 साल में 27,000 सरकारी नौकरियां, नकल माफिया पर कसा शिकंजा

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘जागरण फोरम’ में राज्य सरकार के कड़े फैसलों का रोडमैप साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी, मदरसा बोर्ड भंग करने और लैंड जिहाद के खिलाफ कार्रवाई जैसे निर्णय किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए हैं। सीएम ने बताया कि अब तक 10,000 एकड़ जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई जा चुकी है।

CM Dhami Report Card : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज दैनिक जागरण समूह के प्रतिष्ठित ‘जागरण फोरम’ में शिरकत की। “उत्तराखंड – संभावनाओं का नया द्वार” विषय पर बोलते हुए सीएम ने राज्य की दशा और दिशा बदलने वाले ऐतिहासिक फैसलों की इनसाइड स्टोरी साझा की।

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उन्होंने साफ किया कि सरकार के फैसले केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और मजबूत उत्तराखंड देने के लिए लिए गए हैं।

समान नागरिक संहिता: समानता की ओर पहला कदम

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (UCC) को राज्य सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने यह साहसिक कदम उठाया है। सीएम के अनुसार, यह कानून किसी धर्म या वर्ग के खिलाफ नहीं है।

इसका मूल उद्देश्य सामाजिक समानता, न्याय और खासकर महिलाओं को सशक्त बनाना है। कानून सबके लिए एक समान होना चाहिए, यही संविधान की मूल भावना भी है। इसे लागू करने से पहले हर संवैधानिक पहलू का गहराई से अध्ययन किया गया है।

जनसांख्यिकी बदलाव और लैंड जिहाद पर प्रहार

राज्य की बदलती डेमोग्राफी और पहचान को लेकर सीएम धामी ने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि देवभूमि की सांस्कृतिक आत्मा और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार ने ‘लैंड जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है।

आंकड़े साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक 10,000 एकड़ से ज्यादा सरकारी और वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। यह सिर्फ जमीन छुड़ाने का अभियान नहीं है, बल्कि राज्य के संसाधनों और अस्मिता को बचाने की लड़ाई है। सरकार ने संदेश दिया है कि उत्तराखंड की जमीन और संस्कृति के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शिक्षा में एकरूपता: मदरसा बोर्ड का निर्णय

मदरसा बोर्ड को भंग करने के फैसले पर उठते सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर बच्चे के हाथ में आधुनिक भविष्य देखना चाहती है। हमारा उद्देश्य शिक्षा में पारदर्शिता लाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह निर्णय किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे भी डॉक्टर, इंजीनियर और अफसर बनें। उन्हें आधुनिक ज्ञान और कौशल मिले ताकि वे राष्ट्र निर्माण में बराबर के भागीदार बन सकें।

धर्मांतरण और रोजगार पर सीधी बात

सीएम ने बताया कि राज्य में जबरन या लालच देकर धर्मांतरण रोकने के लिए देश का सबसे सख्त कानून लागू किया गया है। हर नागरिक अपनी आस्था मानने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन धोखे से धर्म परिवर्तन अब उत्तराखंड में संभव नहीं है।

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युवाओं के भविष्य पर बात करते हुए सीएम ने साढ़े चार साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान 27,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। नकल विरोधी कानून और पारदर्शी भर्ती प्रणाली ने युवाओं का भरोसा सिस्टम पर फिर से कायम किया है, जिससे प्रतिभा पलायन पर भी रोक लगी है।

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