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उत्तराखंड में आज से बदल गए ये नियम, जेब पर बढ़ेगा बोझ या मिलेगी राहत? यहां जानें सबकुछ

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देहरादून, 01 अप्रैल (द ऑनलाइन पोस्ट)। उत्तराखंड में नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन से आम जनता की दिनचर्या और जेब पर सीधा असर डालने वाले कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। राजधानी देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट से जहां हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है, वहीं सड़क मार्ग से सफर करने वाले कमर्शियल वाहनों को अब ज्यादा टोल टैक्स चुकाना होगा।

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इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने कूड़ा निस्तारण के नियमों को और सख्त कर दिया है।

हवाई यात्रियों के लिए आज का दिन राहत भरी खबर लेकर आया है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से तीन नई उड़ानों का शेड्यूल प्रभावी हो गया है। कुल्लू-मनाली से एक 48 सीटर विमान सुबह 9:45 बजे देहरादून पहुंचेगा और 10:20 बजे वापस उड़ान भरेगा। यह सेवा सप्ताह में दो दिन, सोमवार और बुधवार को उपलब्ध रहेगी।

इंडिगो एयरलाइंस ने भी अपना नेटवर्क बढ़ाते हुए अहमदाबाद और बेंगलुरु के लिए सीधी कनेक्टिविटी दी है। अहमदाबाद से आने वाली फ्लाइट सुबह 10:10 बजे लैंड करेगी और 11:05 बजे दिल्ली के लिए रवाना होगी। दोपहर 3:30 बजे बेंगलुरु से आने वाला विमान शाम 4:05 बजे अहमदाबाद के लिए उड़ान भरेगा।

सड़क परिवहन की बात करें तो लच्छीवाला टोल प्लाजा पर अब कमर्शियल वाहनों को अधिक भुगतान करना होगा। टोल प्रबंधक मनीष नेगी के मुताबिक, व्यावसायिक चारपहिया वाहनों का शुल्क 170 रुपये से बढ़ाकर 175 रुपये कर दिया गया है। बस और ट्रक के लिए अब 360 रुपये देने होंगे, जबकि भारी वाहनों का शुल्क 395 रुपये तय किया गया है। राहत की बात यह है कि निजी कार और जीप स्वामियों के लिए दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

धर्मावाला टोल प्लाजा पर भी नई दरें लागू हो गई हैं। यहां कार और जीप के लिए एकतरफा शुल्क 65 रुपये और उसी दिन वापसी के लिए 95 रुपये निर्धारित किए गए हैं। हल्के वाहनों के लिए यह दरें 105 और 155 रुपये होंगी। बस-ट्रक के लिए एकतरफा किराया 215 रुपये और कमर्शियल वाहनों के लिए 235 रुपये तय किया गया है। ओवरलोड वाहनों को अब एक फेरे के लिए 415 रुपये का भुगतान करना होगा।

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इन बदलावों के बीच राज्य में ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2026’ भी पूरी तरह लागू हो गया है। शहरी विकास विभाग ने सभी नगर निकायों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि अब घरों से निकलने वाले कूड़े को दो के बजाय चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य होगा। अब तक नीले और हरे डिब्बों का चलन था, लेकिन अब पीले और लाल डिब्बे भी अनिवार्य कर दिए गए हैं।

गीला और सूखा कचरा अलग करने के साथ-साथ अब घरेलू खतरनाक कचरा और सैनिटरी कचरे को भी अलग रखना होगा। शहरी क्षेत्रों में इसकी निगरानी नगर निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतें करेंगी।

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