अल्मोड़ा, 09 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत विजिलेंस हल्द्वानी की टीम ने अल्मोड़ा के लमगड़ा ब्लॉक में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। टीम ने यहां तैनात लेखाकार (अकाउंटेंट) हर सिंह बिष्ट उर्फ हरीश सिंह बिष्ट को ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए कार्यालय परिसर से ही दबोच लिया।
भ्रष्टाचार का यह पूरा खेल शौचालय निर्माण के एक टेंडर से जुड़ा हुआ था। शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को बताया कि उसका ₹3 लाख का शौचालय निर्माण कार्य का टेंडर स्वीकृत हुआ था। इस कार्य से जुड़ी एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद) को रिलीज करने की एवज में आरोपी लेखाकार लगातार रुपयों का दबाव बना रहा था।
आरोपी हर सिंह बिष्ट, जो मूल रूप से अल्मोड़ा के मोहल्ला बांसमीड़ा का निवासी है, ने स्पष्ट कह दिया था कि बिना सुविधा शुल्क दिए फाइल आगे नहीं बढ़ेगी। परेशान होकर पीड़ित ने हल्द्वानी विजिलेंस थाने में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत की प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने जाल बिछाया। पुलिस अधीक्षक विजिलेंस के निर्देशन में एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया, जिसने लमगड़ा ब्लॉक कार्यालय में दबिश दी।
जैसे ही शिकायतकर्ता ने लेखाकार को ₹15,000 की रकम थमाई, पहले से ही मुस्तैद विजिलेंस टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। टीम ने आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली है और उसे हिरासत में लेकर हल्द्वानी रवाना हो गई।
अल्मोड़ा जिले में सरकारी महकमों के भीतर पसरे भ्रष्टाचार पर विजिलेंस का यह प्रहार प्रशासन में हड़कंप मचाने वाला है। गौर करने वाली बात है कि इसी साल 28 मार्च को जागेश्वर क्षेत्र में भी एक ऐसी ही कार्रवाई हुई थी।
तब विजिलेंस ने वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय जागेश्वर में तैनात वन दरोगा नवीन नौटियाल को ₹25,500 की रिश्वत लेते पकड़ा था। वह वन दरोगा लीसा गड़ान-ढुलान के पंजीकरण नवीनीकरण और बकाया बिलों के भुगतान के नाम पर अवैध वसूली कर रहा था।
उत्तराखंड में ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश’ के संकल्प के बीच 15 दिनों के भीतर दो सरकारी अधिकारियों की गिरफ्तारी ने कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में आरोपी लेखाकार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।









