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उत्तराखंड में जमीन अधिग्रहण के नियम बदले, अब सर्किल रेट से 4 गुना तक मिलेगा मुआवजा

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देहरादून, 10 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand Land Acquisition New SOP : उत्तराखंड में अब सड़क, बांध और उद्योगों जैसी विकास परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराना न केवल आसान होगा, बल्कि भू-स्वामियों को भी बेहतर और पारदर्शी मुआवजा मिलेगा। शासन ने भूमि अधिग्रहण के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब सरकार ‘भूमि अर्जन अधिनियम-2013’ की जटिल और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय भू-स्वामियों की आपसी सहमति से सीधे जमीन खरीद सकेगी।

राजस्व सचिव सुरेंद्र नारायण पांडे के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी परियोजनाओं में होने वाली देरी को समाप्त करना और भू-स्वामियों को बाजार दरों पर उचित लाभ दिलाना है। पहले अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने में दो वर्ष या उससे अधिक का समय लग जाता था, लेकिन अब आपसी सहमति होने पर जिला प्रशासन त्वरित रजिस्ट्री करा सकेगा।

मुआवजे का नया गणित और पारदर्शिता

नई एसओपी में मुआवजे के निर्धारण के लिए कड़े और पारदर्शी मानक तय किए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में बाजार मूल्य का दोगुना और ग्रामीण इलाकों में चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। बाजार मूल्य तय करने के लिए पिछले तीन वर्षों के बैनामों (Sale Deeds) का औसत निकाला जाएगा या वर्तमान सर्किल दर को आधार बनाया जाएगा। इनमें से जो भी दर अधिक होगी, उसी के आधार पर भुगतान किया जाएगा।

किसानों के लिए अतिरिक्त लाभ का प्रावधान

सरकार ने उन किसानों के हितों का विशेष ध्यान रखा है जिनकी अधिकांश जमीन प्रोजेक्ट में चली जाएगी। यदि कोई किसान जमीन देने के बाद पूरी तरह भूमिहीन हो जाता है, तो उसे निर्धारित मुआवजे पर 25% अतिरिक्त राशि दी जाएगी। इसी तरह, 50% से अधिक भूमि जाने पर 12% अतिरिक्त बोनस का प्रावधान है। जमीन पर मौजूद फसल, पेड़ और मकान जैसी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन अलग से किया जाएगा। यदि अधिग्रहण के कारण किसी को अपना व्यवसाय बदलना पड़ता है, तो उसका खर्च भी सरकार वहन करेगी।

समितियों का गठन और अपील की प्रक्रिया

जमीन खरीद की प्रक्रिया की निगरानी के लिए दो स्तर की समितियां बनाई गई हैं। 10 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता वाली समिति जिम्मेदारी संभालेगी, जबकि 10 करोड़ से अधिक की लागत वाले प्रोजेक्ट के लिए जिलाधिकारी (DM) खुद समिति के अध्यक्ष होंगे। यदि कोई भू-स्वामी समिति द्वारा तय की गई दरों से असंतुष्ट है, तो वह 30 दिनों के भीतर मंडलायुक्त के पास अपील कर सकता है, जिनका निर्णय अंतिम माना जाएगा।

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