देहरादून, 10 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। राजधानी में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आने वाले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्र-छात्राओं के लिए रहने की समस्या जल्द हल हो सकती है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर देहरादून में एक समर्पित ओबीसी छात्रावास (Dehradun OBC Hostel) के निर्माण की मांग उठाई है।
मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र में चौहान ने जोर देकर कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) छात्रावासों की तर्ज पर ही पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस औपचारिक भेंट के दौरान मनवीर चौहान ने राज्य सरकार के युवा कल्याण संकल्पों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न पर्वतीय जिलों, विशेषकर उत्तरकाशी से बड़ी संख्या में ओबीसी समाज के छात्र उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देहरादून आते हैं। इनमें से कई छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जिनके लिए शहर में निजी आवास या पीजी का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण होता है।
चौहान ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि उपयुक्त आवासीय सुविधा न होने के कारण कई मेधावी छात्र अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने या सीमित संसाधनों में संघर्ष करने को मजबूर हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि सरकार राजधानी में एक सुव्यवस्थित ओबीसी छात्रावास का निर्माण करती है, तो इससे न केवल छात्रों का भविष्य संवरेगा बल्कि उन्हें शैक्षणिक और पेशेवर स्तर पर समान अवसर प्राप्त हो सकेंगे। इस कदम को उत्तरकाशी और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं के सशक्तिकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रस्तावित योजना का प्रभाव
इस प्रस्तावित योजना के क्रियान्वयन से उत्तराखंड के शैक्षिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। इसका प्राथमिक लक्षित समूह उत्तरकाशी और राज्य के अन्य दूरस्थ पर्वतीय जिलों के ओबीसी छात्र हैं, जिन्हें अब राजधानी में पढ़ाई के दौरान रहने की चिंता नहीं करनी होगी। योजना के तहत सुविधा का स्वरूप पूरी तरह सरकारी होगा, जिसे एससी/एसटी छात्रावासों की तर्ज पर संचालित किया जाएगा ताकि छात्रों को न्यूनतम खर्च पर बेहतर आवास मिल सके।
इसका मुख्य उद्देश्य उन मेधावी युवाओं की राह से आर्थिक बाधाओं को हटाना है, जो संसाधनों के अभाव में अपनी उच्च शिक्षा को बीच में ही छोड़ देते हैं। योजना की प्रगति की दिशा में अगला कदम अब मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप संबंधित विभाग द्वारा इसकी तकनीकी और व्यावहारिक फिजिबिलिटी की समीक्षा करना होगा, जिससे इस परियोजना को धरातल पर उतारा जा सके।









