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पहाड़ी टोपी से लेकर लाल चावल तक, पीएम मोदी ने कैसे बनाया उत्तराखंड के उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड?

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देहरादून, 14 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न) 

PM Modi Dehradun Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अपने 28वें उत्तराखंड दौरे पर देहरादून पहुंचे। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान उन्होंने बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर इसे देश को समर्पित किया। यह एक्सप्रेस-वे न केवल देश और प्रदेश की राजधानियों के बीच की दूरी और समय को कम करेगा, बल्कि उत्तराखंड के आर्थिक, औद्योगिक और पर्यटन क्षेत्रों के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।

प्रधानमंत्री का यह दौरा कनेक्टिविटी के साथ-साथ देवभूमि के प्रति उनके गहरे आध्यात्मिक और भावनात्मक जुड़ाव को भी रेखांकित करता है। जानकारों के अनुसार, यह एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी को नई गति देते हुए राज्य के विकास की एक मजबूत बुनियाद रखेगा।

सांस्कृतिक दूत के रूप में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मोदी ने केवल बुनियादी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को भी वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया है। 26 जनवरी 2022 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर पारंपरिक साफे के स्थान पर उत्तराखंडी पहाड़ी काली टोपी पहनकर उन्होंने राज्य की संस्कृति के प्रति अपने सम्मान का परिचय दिया था। इस टोपी पर अंकित ब्रह्मकमल अब वैश्विक स्तर पर उत्तराखंड की पहचान बन चुका है।

इजराइल यात्रा और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रधानमंत्री को पहाड़ी टोपी में देखा गया, जिससे राज्य की विरासत सात समंदर पार पहुंची। इसी तरह, अमेरिकी राष्ट्रपति को उत्तराखंड के प्रसिद्ध ‘लाल चावल’ भेंट कर उन्होंने राज्य के कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग वैश्विक स्तर पर की है।

स्थानीय उत्पादों को मिली वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री के बीच होने वाली भेंट केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह राज्य के उत्पादों के प्रचार का जरिया बनी है। मुनस्यारी की शॉल, पुरोला के लाल चावल, अल्मोड़ा के तांबे के बर्तन, पहाड़ी शहद और बदरी गाय का घी जैसे उत्पाद प्रधानमंत्री के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आए हैं।

इसके अतिरिक्त, जागेश्वर धाम, धारी देवी और बाबा नीब करौरी की प्रतिकृतियां भेंट किए जाने से राज्य की आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय विमर्श में महत्वपूर्ण स्थान मिला है।

एक्सप्रेस-वे से क्या बदलेगा?

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का निर्माण होने से न केवल आम यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि यह कॉरिडोर माल ढुलाई और व्यापार के लिए भी एक लाइफलाइन बनेगा। इससे पहले के दौरों में प्रधानमंत्री ने चार धाम परियोजना, आदि कैलाश और जागेश्वर धाम जैसे धार्मिक स्थलों के कायाकल्प पर जोर दिया था, जिससे राज्य में धार्मिक पर्यटन का आधार और व्यापक हुआ है।

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