देहरादून, 20 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आईवियर ब्रांड ‘लेंसकार्ट’ के एक शोरूम (Dehradun Lenskart Controversy) में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जबरन घुसकर विरोध प्रदर्शन किया।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में प्रदर्शनकारी शोरूम के कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाते और कलाई पर कलावा बांधते नजर आ रहे हैं। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और देश भर में शोरूम बंद कराने की चेतावनी दी।
बजरंग दल का 2 दिन का अल्टीमेटम
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ताओं ने वीडियो में कंपनी प्रबंधन को सीधे तौर पर ललकारा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी अपने कर्मचारियों को धार्मिक प्रतीक जैसे तिलक और कलावा पहनने से रोक रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा, “हम चेतावनी देते हैं कि 2 दिन के अंदर अपनी ऑफिशियल साइट पर माफीनामा जारी करें।
अगर कर्मचारियों को धार्मिक प्रतीकों से रोका गया, तो देश के हर शहर में लेंसकार्ट का विरोध होगा।” उन्होंने कंपनी को अन्य देशों में व्यापार करने की सलाह देते हुए कहा कि भारत में माफी मांगे बिना काम नहीं करने दिया जाएगा।
संजय सिंह का पलटवार: ‘गुंडागर्दी का लाइसेंस किसने दिया?’
इस घटना पर राजनीति भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने वीडियो साझा करते हुए बजरंग दल और भाजपा पर निशाना साधा है।
संजय सिंह ने सवाल किया, “इनको गुंडागर्दी का लाइसेंस किसने दिया? लेंसकार्ट के मालिक पीयूष बंसल खुद हिंदू हैं, वह ऐसा कोई आदेश क्यों देंगे जिससे भावनाएं आहत हों।” उन्होंने आगे कहा कि हर कंपनी का अपना ड्रेस कोड होता है जिसे सभी धर्मों के लोग मानते हैं, लेकिन भाजपा ने देश को नफरत की फैक्ट्री बना दिया है।
पुराने डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ विवाद, कंपनी ने दी सफाई
यह पूरा विवाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए कंपनी के एक पुराने ‘इंटरनल डॉक्यूमेंट’ के बाद शुरू हुआ। इस कथित आदेश में कर्मचारियों को बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक चिन्हों के साथ स्टोर पर आने की मनाही थी। हालांकि, विवाद बढ़ता देख कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है और वर्तमान में कंपनी की ऐसी कोई नीति नहीं है।
लेंसकार्ट की नई ‘स्टाइल गाइड’
कंपनी ने इस गलतफहमी पर खेद जताते हुए एक नई “स्टोर स्टाइल गाइड” जारी की है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि कर्मचारी ड्यूटी के दौरान अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक पहनने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वे विविधता और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।









