देहरादून, 24 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। देहरादून शहर के पश्चिमी हिस्से को भीषण ट्रैफिक जाम से बचाने के लिए निर्माणाधीन 12 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास का काम अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अनुसार, इस फोर-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे का करीब 44 फीसदी काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। 716 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अप्रैल 2027 तक जनता के लिए समर्पित करने का लक्ष्य रखा गया है।
शहर में प्रवेश किए बिना गुजरेंगे भारी वाहन
यह नया बाईपास झाझरा से शुरू होकर आशारोड़ी चेक पोस्ट के पास दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से सीधे जुड़ेगा। इस रूट के तैयार होने के बाद सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया, विकासनगर, हर्बर्टपुर और पोंटा साहिब की ओर जाने वाले भारी वाहनों को देहरादून शहर के भीतर आने की जरूरत नहीं होगी।
वर्तमान में इन वाहनों को प्रेमनगर और बल्लूपुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरना पड़ता है, जिससे पीक आवर्स में घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है।
वन्यजीव सुरक्षा के लिए विशेष कॉरिडोर
पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस बाईपास में आधुनिक इंजीनियरिंग का उपयोग किया गया है। चूंकि यह मार्ग वन क्षेत्र के करीब से गुजरता है, इसलिए जानवरों की आवाजाही को निर्बाध रखने के लिए 350 मीटर लंबा ओवरपास बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, विशेष कैटल ब्रिज का निर्माण भी किया जा रहा है ताकि वन्यजीव और मवेशी सुरक्षित रूप से सड़क पार कर सकें। वन क्षेत्र में वाहनों के लिए गति सीमा भी निर्धारित की जाएगी।
पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को लाभ
इस बाईपास के चालू होने से न केवल स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी, बल्कि दिल्ली की ओर से आने वाले उन पर्यटकों के लिए भी सफर छोटा हो जाएगा जो सीधे मसूरी या चकराता जाना चाहते हैं। इससे बल्लूपुर चौक और प्रेमनगर बाजार में ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम होने की संभावना है।









