देहरादून, 25 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘हिमालय पुत्र’ के नाम से विख्यात दिवंगत हेमवती नंदन बहुगुणा की 107वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को उत्तराखंड के सियासी दिग्गजों ने उन्हें नमन किया। राजधानी देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर सरकार के प्रतिनिधियों ने बहुगुणा के राजनीतिक जीवन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश का हिस्सा) के प्रति उनके विशेष लगाव को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री धामी ने उनके व्यक्तित्व को जनसेवा और सादगी का प्रतीक बताया।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने उनके प्रशासनिक योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा की कर्मभूमि भले ही इलाहाबाद (प्रयागराज) रही, लेकिन वे अपनी जन्मभूमि के विकास के प्रति हमेशा सजग रहे। उनियाल के अनुसार, बहुगुणा ने ही सबसे पहले भौगोलिक परिस्थितियों को समझते हुए अलग ‘पर्वतीय विकास विभाग’ की स्थापना की थी। इस कदम ने दुर्गम इलाकों के समग्र विकास की नींव रखी, जो आज भी राज्य के नीति-निर्धारण में प्रेरणा का काम कर रहा है।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बहुगुणा एक दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता थे, जिन्होंने हमेशा पर्वतीय क्षेत्रों के हितों की पुरजोर वकालत की। उनके द्वारा स्थापित किए गए आदर्शों को राज्य के विकास में आत्मसात करने का आह्वान किया गया।
राजनीतिक विरासत और सफर
25 अप्रैल 1919 को पौड़ी गढ़वाल के ग्राम बुघाणी में जन्मे हेमवती नंदन बहुगुणा का राजनीतिक सफर भारतीय लोकतंत्र के सबसे प्रभावशाली अध्यायों में से एक है। उत्तर प्रदेश के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासन को नई दिशा दी, जिसमें ‘पर्वतीय विकास विभाग’ का गठन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
इसी विभाग के जरिए उन्होंने पहाड़ों के लिए अलग बजट और विशेष योजनाओं की नींव रखी थी। सादगीपूर्ण जीवन और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच गहरी पैठ रखने वाले बहुगुणा को उनकी दूरदर्शी सोच और जन-केंद्रित राजनीति के लिए आज भी याद किया जाता है।









