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Saharanpur-Haridwar Expressway : नवंबर तक काम पूरा करने का अल्टीमेटम, दिल्ली-देहरादून का सफर होगा और आसान

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देहरादून, 26 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले हर हाल में पूरा करने का निर्णय लिया है।

लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) और एनएचएआई (NHAI) को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्माण एजेंसियों से समन्वय कर अटके हुए कार्यों में तेजी लाएं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सहारनपुर-हरिद्वार एक्सप्रेसवे है, जिसे आगामी नवंबर तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रमुख प्रोजेक्ट्स के लिए तय हुई डेडलाइन

लोनिवि के विभागाध्यक्ष (HoD) राजेश शर्मा के अनुसार, राज्य में केंद्र और प्रदेश सरकार के सहयोग से सड़क, पुल और फ्लाईओवर्स के कई बड़े काम अंतिम चरण में हैं। वर्तमान में इनमें से लगभग 75 से 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

विभाग ने अब सभी एजेंसियों के लिए ‘डेडलाइन’ अनिवार्य कर दी है। विशेष रूप से सहारनपुर से हरिद्वार एक्सप्रेसवे, पौंटा से बल्लूपुर हाईवे फोरलेन, और हरिद्वार, रुद्रपुर व काशीपुर बाईपास के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जोशीमठ-मलारी सड़क को प्राथमिकता पर रखा गया है।

Saharanpur-Haridwar Expressway: ₹1475 करोड़ का गेमचेंजर

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का अहम हिस्सा माना जा रहा सहारनपुर-हरिद्वार एक्सप्रेसवे 50.7 किलोमीटर लंबा है। यह 6-लेन का ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट ₹1475 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा है। यह मार्ग सहारनपुर के हलगोया से शुरू होकर रुड़की को बाईपास करते हुए हरिद्वार के बहादराबाद तक जाएगा। इसके शुरू होने से हरिद्वार, सिडकुल और रुड़की-भगवानपुर से दिल्ली और उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी काफी बेहतर हो जाएगी।

महिला आरक्षण पर राजनीतिक घमासान

एक तरफ जहां सरकार विकास कार्यों को रफ्तार दे रही है, वहीं दूसरी तरफ महिला आरक्षण के मुद्दे पर प्रदेश में सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। भट्ट ने आरोप लगाया कि विपक्ष महिला आरक्षण को लेकर असंवैधानिक और हास्यास्पद दावे कर रहा है।

उन्होंने कहा, “जो नेता 2022 में एक महिला का टिकट काटकर खुद चुनाव लड़े हों, उन्हें महिला हित की बातें शोभा नहीं देतीं।” भाजपा का दावा है कि संसद में महिला आरक्षण विधेयक का विरोध कर विपक्ष ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है और जनता 2029 में इसका जवाब देगी।

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