हरिद्वार, 26 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे का विवाह समारोह विवादों के घेरे में आ गया है। राजाजी टाइगर रिजर्व के हरिद्वार रेंज स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर में भव्य शादी के आयोजन की तैयारियों को वन विभाग ने नियमों का उल्लंघन बताते हुए रुकवा दिया है।
शनिवार को मंदिर परिसर में लगाए गए बड़े पंडाल, स्टेज, कूलर और जेनरेटरों को पार्क प्रशासन ने आनन-फानन में हटवाया। इस मामले में पार्क प्रशासन की ओर से मंदिर समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।
अधिकारियों की अनुमति का दावा और सफाई
विवाद के बीच रविवार दोपहर कैबिनेट मंत्री खजान दास वधू पक्ष के साथ मंदिर पहुंचे और बेहद सादगी से पूजा-अर्चना व फेरों की रस्म अदा की। मंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनकी आस्था मां सुरेश्वरी देवी में है और बेटे के स्वस्थ होने की मन्नत के कारण वे यहाँ शादी करना चाहते थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि वन अधिकारियों ने उन्हें अनुमति की अनिवार्यता के बारे में पहले सूचित नहीं किया था। मंत्री के अनुसार, कुछ दिन पूर्व जब वे मंदिर आए थे, तब वन निदेशक भी उनके साथ थे और उन्होंने मौखिक रूप से आयोजन पर सहमति दी थी।
राजनीतिक साजिश का आरोप
कैबिनेट मंत्री ने इस विवाद को एक राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं वन नियमों और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील हैं। उनका तर्क है कि यदि विभाग को आपत्ति थी तो उन्हें पहले ही आगाह कर देना चाहिए था, जिससे वे किसी अन्य स्थान पर आयोजन की व्यवस्था कर लेते।
दूसरी ओर, सुरेश्वरी देवी मंदिर समिति के महामंत्री आशीष मारवाड़ी ने कहा कि आयोजन को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने दावा किया कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान और भंडारा था, जिसे अब पार्क प्रशासन की कार्रवाई के बाद और भी सीमित कर दिया गया है।
पार्क प्रशासन और पीसीसीएफ का कड़ा रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (हॉफ) रंजन कुमार मिश्र ने स्पष्ट किया कि राजाजी टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र होने के कारण मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या बड़े आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। रविवार सुबह पार्क प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर रिजर्व के गेट बंद कर दिए थे, जिससे आम श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ा। दोपहर 12 बजे के बाद ही गेट खोले गए, तब जाकर लोग दर्शन कर सके।









