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सीएम धामी का बड़ा दावा: परिसीमन के बाद उत्तराखंड में 35 महिला विधायक होना तय था, विपक्ष ने रोका

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देहरादून, 28 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने सदन के समक्ष नारी शक्ति वंदन अधिनियम को यथाशीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करने वाला एक सर्वसम्मत संकल्प प्रस्ताव भी रखा।

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की विभूतियों गौरा देवी, तीलू रौतेली और बेलमती चौहान जैसी वीरांगनाओं को नमन किया। उन्होंने कहा कि आज नारी शक्ति केवल सहभागिता तक सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में है। चंद्रयान-3 की सफलता से लेकर खेल और रक्षा क्षेत्रों में महिलाओं का बढ़ता वर्चस्व इसका प्रमाण है।

विपक्ष के रुख पर जताई कड़ी आपत्ति

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023 में संसद में आए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने मिलकर इस युग परिवर्तनकारी पहल को बाधित किया। उन्होंने कहा, “जब संसद में संख्या बल के कारण बिल पारित नहीं हो पाया, तब विपक्षी नेताओं की तालियां देखकर मुझे महाभारत की वह सभा याद आ गई जिसमें द्रौपदी का अपमान हुआ था।”

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अब परिसीमन को लेकर लोगों में भ्रम फैला रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार ने पहले ही साफ किया है कि किसी भी राज्य की सीटों के साथ भेदभाव नहीं होगा।

उत्तराखंड को होने वाले लाभ का खाका

मुख्यमंत्री ने राज्य के संदर्भ में इस अधिनियम के फायदों पर चर्चा करते हुए कहा कि परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा में सीटों की संख्या 105 होने की संभावना थी। इस स्थिति में राज्य में कम से कम 35 महिला विधायक सदन में होतीं। साथ ही, सांसदों की संख्या भी 5 से बढ़कर 7 या 8 हो जाती। धामी ने तंज कसते हुए कहा कि यदि सामान्य परिवारों की महिलाएं राजनीति में आएंगी, तो विपक्षी दलों की वंशवादी राजनीति की दुकानें बंद हो जाएंगी।

महिला कल्याण के लिए बजटीय प्रावधान

मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों का विवरण देते हुए बताया कि पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पांच गुना वृद्धि हुई है।

  • केंद्रीय बजट: वर्ष 2026-27 में महिलाओं और बालिकाओं के लिए 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान है।
  • राज्य बजट: उत्तराखंड सरकार ने इस वर्ष 20 हजार करोड़ रुपये का जेंडर बजट रखा है, जो पिछले वर्ष से 16% अधिक है।
  • आर्थिक सहायता: स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण और ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 2.65 लाख महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया गया है।

यूसीसी और सुरक्षा पर जोर

धामी ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) लागू कर मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति दिलाई है। उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह धारा 370 हटाई गई और राम मंदिर का निर्माण हुआ, उसी तरह महिलाओं को उनका पूरा अधिकार दिलाने का संकल्प भी अवश्य पूरा होगा।

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