देहरादून, 29 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की दिशा में धामी सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि राज्य में ‘मदरसा बोर्ड’ को पूरी तरह भंग कर दिया जाएगा। सरकार के इस कदम का सीधा उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को धार्मिक शिक्षा के दायरे से बाहर निकालकर आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि राज्य के भीतर अब शिक्षा का दोहरा ढांचा नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में समान अवसर मिलने चाहिए, जो केवल एक समान पाठ्यक्रम (Common Syllabus) के माध्यम से ही संभव है।
1 जुलाई 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार द्वारा तय की गई समय सीमा के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इसके बाद हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून सहित प्रदेश के सभी जिलों में संचालित हो रहे मदरसों को ‘उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा बोर्ड’ से संबद्ध होना होगा।
ये सभी संस्थान अब राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत काम करेंगे। इसका प्रभावी अर्थ यह है कि अब मदरसों में भी वही एनसीईआरटी (NCERT) आधारित किताबें और पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जो राज्य के अन्य सरकारी स्कूलों में अनिवार्य है।
“आदेश नहीं माना तो बंद होंगे संस्थान”
नीतिगत बदलाव के साथ-साथ मुख्यमंत्री धामी ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने उन संस्थानों को अंतिम चेतावनी दी है जो सरकारी आदेशों को लागू करने में आनाकानी कर रहे हैं।
सीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो मदरसे तय समय सीमा के भीतर नया पाठ्यक्रम लागू नहीं करेंगे या नियमों का उल्लंघन करेंगे, उन्हें हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई या राजनीतिक दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
शिक्षा के ढांचे में क्या बदलेगा?
वर्तमान व्यवस्था में मदरसा बोर्ड एक स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करता है, जहां कुरान, हदीस और अरबी भाषा जैसी धार्मिक शिक्षाओं की प्रधानता रहती है। हालांकि कुछ मदरसों में गणित और अंग्रेजी जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता और मानक अक्सर मुख्यधारा के स्कूलों से भिन्न होते हैं।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद, मदरसों को बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक मानकों के मामले में उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड के नियमों पर खरा उतरना होगा। सरकार का तर्क है कि इस बदलाव से मदरसों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों के रास्ते आसान होंगे, क्योंकि उनकी डिग्री अन्य बोर्ड परीक्षार्थियों के समकक्ष मान्य होगी।









