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उत्तराखंड के चालान रेट में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी, ₹500 का जुर्माना अब सीधे ₹5000

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देहरादून, 5 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में अब यातायात नियमों का उल्लंघन आपकी जेब पर पहले से कहीं ज्यादा भारी पड़ने वाला है। राज्य सरकार ने सड़क हादसों को नियंत्रित करने के लिए चालान की दरों में संशोधन की प्रक्रिया तेज कर दी है। परिवहन विभाग ने मोटर यान अधिनियम 1988 के तहत जुर्माने की नई दरों का एक विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।

अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव की पुष्टि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने की है। इसमें कुल 38 श्रेणियों में जुर्माने की राशि बढ़ाने की सिफारिश की गई है। वर्तमान में यह प्रस्ताव वित्त विभाग के पास परीक्षण के लिए है, जिसके बाद इसे कैबिनेट की आगामी बैठक में अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

मुख्य सचिव के निर्देश पर सख्त हुआ विभाग

हाल ही में हुई सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी और सख्त व्यवस्था लागू की जाए। इसी के बाद विभाग ने चालान की दरों को वर्तमान की तुलना में दोगुना करने का खाका तैयार किया।

प्रस्तावित जुर्माने की नई दरें

नए प्रस्ताव में सीट बेल्ट, हेलमेट, बीमा और ओवरलोडिंग जैसे सामान्य उल्लंघनों के साथ-साथ गंभीर लापरवाही पर सख्त आर्थिक दंड का प्रावधान है:

नियम का उल्लंघनवर्तमान जुर्माना (लगभग)प्रस्तावित नया जुर्माना
सार्वजनिक स्थान पर स्टंट/रेस₹10,000 (दूसरी बार)₹20,000
वायु/ध्वनि प्रदूषण उल्लंघन₹5,000₹10,000
बिना लाइसेंस ड्राइविंग₹2,500₹5,000
वाहन में अवैध मॉडिफिकेशन₹5,000₹10,000
बिना हेलमेट वाहन चलाना₹1,000₹1,500 (साथ ही 3 माह DL सस्पेंड)
सीट बेल्ट न लगाना₹1,000₹2,000
तेज रफ्तार (Over Speeding)₹2,000₹4,000
मोबाइल का उपयोग₹1,000 (पहली बार)₹2,000 (पहली बार)

चालान की संख्या में भारी उछाल

राज्य में यातायात नियमों की अनदेखी का स्तर इस बात से समझा जा सकता है कि पिछले एक साल में चालान की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में कुल 3,92,303 चालान किए गए थे, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 8,38,391 तक पहुंच गए।

इस दौरान ई-डिटेक्शन सिस्टम और एएनपीआर कैमरों की मदद से बड़ी संख्या में नियम तोड़ने वालों को पकड़ा गया। चालान से होने वाली राजस्व प्राप्ति में भी 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो ₹45 करोड़ से बढ़कर ₹62 करोड़ हो गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि जुर्माने की दरों में इस बढ़ोतरी से सड़कों पर अनुशासन बढ़ेगा और हादसों में कमी आएगी।

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