देहरादून, 20 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में हुए बहुचर्चित एंजेल चकमा हत्याकांड (Angel Chakma Murder Case) की जांच रिपोर्ट पुलिस ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के सामने पेश कर दी है। पुलिस ने आयोग को बताया है कि इस मामले के छह आरोपियों में से कोई भी अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से ताल्लुक नहीं रखता। इसके साथ ही कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने वारदात के दौरान किसी भी तरह की नस्लीय टिप्पणी होने की बात से साफ इनकार किया है।
दूसरी तरफ, अरुणाचल प्रदेश चकमा स्टूडेंट्स यूनियन और पीड़ित पक्ष ने पुलिस के इन दावों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस के शुरुआती बयानों और मौजूदा दावों में विरोधाभास है, जिससे जांच की दिशा भटक रही है। छात्र संगठन ने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई है कि मामले के दो नाबालिग आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी अब तक कानून की गिरफ्त से बाहर है।
नस्लीय टिप्पणी के साक्ष्य नहीं: एसपी देहात
हत्याकांड (Angel Chakma Murder Case) की विवेचना और कानूनी पहलुओं को लेकर एसपी देहात पंकज गैरोला ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि पुलिस टीम ने मामले की गहनता से जांच की है। विवेचना के दौरान आरोपियों द्वारा सीधे तौर पर किसी भी तरह की नस्लीय या जातिसूचक टिप्पणी करने के ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसी तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की है।
मुख्य आरोपी नेपाल फरार, प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू
इस मामले में सहसपुर के क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज कुमार अपनी टीम के साथ बीते शुक्रवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष पेश हुए। पुलिस अधिकारियों ने आयोग को बताया कि मामले का मुख्य आरोपी यश राज अवस्थी घटना के बाद नेपाल भाग गया है। उसे वापस भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण (Extradition) की कानूनी कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। आरोपी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेड नोटिस जारी कराने के लिए भी पुलिस की विशेष टीम काम कर रही है।
Angel Chakma Murder Case : क्या है पूरा घटनाक्रम?
मूल रूप से त्रिपुरा के उनाकोटी के रहने वाले एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल पर पिछले साल 9 दिसंबर 2025 को देहरादून के सेलाकुई इलाके में छह लोगों के एक गुट ने हमला कर दिया था। बताया गया था कि भाइयों ने कथित तौर पर की गई नस्लीय टिप्पणियों का विरोध किया था, जिसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ। गंभीर रूप से घायल एंजेल ने अस्पताल में इलाज के दौरान 26 दिसंबर को दम तोड़ दिया था।
पीड़ित पिता का छलका दर्द
त्रिपुरा के सिपाहीजाला में तैनात एंजेल के पिता तरुण चकमा ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि एंजेल एक होनहार छात्र था और पढ़ाई पूरी होने के बाद उसे 12 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर नौकरी मिल गई थी। 27 दिसंबर से उसकी इंटर्नशिप शुरू होनी थी, लेकिन उससे एक दिन पहले ही उसकी मौत हो गई।
तरुण चकमा के मुताबिक, उन्होंने बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए 30 साल तक कठिन ड्यूटी की। इस हादसे के बाद उनका छोटा बेटा माइकल, जो देहरादून में ही ग्रेजुएशन सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहा है, गहरे सदमे में है और पूरी तरह चुप हो गया है। Angel Chakma Murder
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