देहरादून, 17 जून 2026 (दून हॉराइज़न)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देहरादून की छात्रा रिया और सीकर के छात्र उमेश की दुखद मृत्यु पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए देश के युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा राष्ट्रीय मंच पर उठाया है। इस संवेदनशील हस्तक्षेप के बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने केंद्र सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं की अव्यवस्थित व्यवस्था में तत्काल सुधार करने और छात्रों को मानसिक सुरक्षा देने की मांग तेज कर दी है।
परीक्षा व्यवस्था और युवाओं का मानसिक तनाव
अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संचार विभाग के सचिव वैभव वालिया ने इस संबंध में बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि रिया की आत्महत्या केवल एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उस गंभीर मानसिक दबाव का प्रतीक है जिससे आज देश के लाखों छात्र हर दिन गुजर रहे हैं। मौजूदा परीक्षा प्रणालियाँ युवाओं को अवसर देने के बजाय उनके भीतर हताशा और निराशा पैदा कर रही हैं।
उत्तराखंड कांग्रेस का रुख साफ है कि रिया जैसी होनहार बेटियों की असमय मृत्यु पूरे समाज और शासन तंत्र के लिए आत्मचिंतन का विषय है। राहुल गांधी ने जिस मानवीय दृष्टिकोण के साथ इस दर्द को देश के सामने रखा है, उसने यह साबित कर दिया है कि युवाओं का भविष्य और उनका मानसिक स्वास्थ्य किसी भी राजनीतिक विमर्श से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
अक्सर देखा जाता है कि कोचिंग सेंटरों और प्रतियोगी परीक्षाओं वाले शहरों में छात्रों की काउंसिलिंग के लिए कोई मजबूत सरकारी ढांचा मौजूद नहीं है। देहरादून और उसके आसपास के शैक्षणिक केंद्रों में बढ़ रहा कॉम्पिटिशन का दबाव युवाओं को अकेला कर रहा है। मनोचिकित्सकों के मुताबिक, पेपर लीक की घटनाएं, परीक्षाओं में देरी और नतीजों की अनिश्चितता छात्रों के मानसिक संतुलन को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि केंद्र सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए परीक्षा प्रणालियों में पूरी पारदर्शिता लाए। इसके साथ ही देश के सभी प्रमुख शैक्षणिक और कोचिंग हब्स में अनिवार्य रूप से मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन और प्रोफेशनल काउंसिलिंग सेंटर स्थापित किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी अपूरणीय क्षति न उठानी पड़े।









