Uttarakhand Andolankari Protest : उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष नवनीत गुसाईं ने शासन को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि नियुक्तियों के मामले का निस्तारण जल्द नहीं हुआ तो यह आंदोलन बेहद उग्र रूप अख्तियार करेगा। वर्ष 2013 से भटक रहे इन अभ्यर्थियों की उम्र अब 55 वर्ष के आसपास पहुंच चुकी है। उनके जीवन और नौकरी के बेहद कम साल बचे हैं। शासन-प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
शहीद स्मारक देहरादून के प्रांगण में अपनी मांगों को लेकर अड़े राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों का क्रमिक अनशन आज नौवें दिन भी लगातार जारी रहा। उत्तराखंड में विशेष एक्ट पास हो जाने के बावजूद पिछले दो सालों से सरकारी महकमों में इन आश्रितों की नियुक्तियों का रास्ता पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है। अपनी वाजिब नियुक्तियों की बाट जोह रहे आंदोलनकारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुके हैं।
उत्तरकाशी जिले से विशेष तौर पर देहरादून पहुंचे आंदोलनकारी पंकज रावत, दिनेश राणा तथा विकास रावत आज धरना स्थल पर क्रमिक अनशन की कमान संभालते हुए सुबह से भूख हड़ताल पर बैठे। नौ दिन का लंबा समय बीत जाने के बाद भी शासन या सरकार का कोई भी आधिकारिक प्रतिनिधि या जनप्रतिनिधि आंदोलनकारियों की सुध लेने शहीद स्मारक परिसर में नहीं पहुंचा है। इस उपेक्षा से आंदोलनकारियों में भारी रोष व्याप्त है।
धरना स्थल पर सुबह की कार्यवाही शुरू होते ही सभी प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुई भीषण और दर्दनाक दुर्घटना को लेकर गहरा शोक व्यक्त किया। वहां जिंदा जलने से असमय मौत का शिकार हुए 15 निर्दोष छात्रों की आत्मा की शांति के लिए आंदोलनकारियों ने अपनी जगह खड़े होकर दो मिनट का मौन रखा और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सरकारी तंत्र की घोर उपेक्षा से नाराज आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर इकठ्ठा होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अपने हक की कानूनी लड़ाई लड़ रहे इन पीड़ितों का स्पष्ट कहना है कि जिन्होंने अलग उत्तराखंड राज्य के गठन के संघर्ष में अपनी जान की बाजी लगा दी थी, आज उन्हीं के परिवारों और आश्रितों के साथ प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह घोर अन्याय करने पर उतारू हो चुका है।
धरने को जमीनी मजबूती देने के लिए आज राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों से कई प्रमुख चेहरे शहीद स्मारक पहुंचे। एकजुटता दिखाने वालों में मुख्य रूप से अम्बुज शर्मा, रामकिशन, शैलेश सेमवाल, नवीन नैथानी, नवनीत गुसाईं, मनमोहन रावत और सुरेश कुमार शामिल रहे जिन्होंने आंदोलन को हर स्तर पर जारी रखने का संकल्प दोहराया।
प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाने के लिए प्रदर्शन में प्रभात डंडरियाल, मनोरथ ध्यानी, विनोद असवाल, लक्ष्मी बिष्ट, प्रतिभा चौहान, रामपाल, देवेश्वर कला, एडवोकेट अनुराधा मेंदोला और हरप्रीत सिंह भी पूरे समय धरना स्थल पर डटे रहे। इन सभी वरिष्ठ सहयोगियों ने एक सुर में राज्य सरकार से तुरंत सभी विधिक और तकनीकी अड़चनें दूर कर पीड़ितों को तत्काल नियुक्ति पत्र सौंपने की मांग की है।









