देहरादून, 26 जून, 2026 (दून हॉराइज़न)।
LUCC Scam : उत्तराखंड के बहुचर्चित 800 करोड़ रुपये के एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी) चिटफंड घोटाले में सीबीआई ने तगड़ी विधिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बड़ी घेराबंदी करते हुए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में फैली करीब 25 करोड़ रुपये की 23 बेनामी संपत्तियों को अटैच कर लिया है।
अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम (बड्स) के तहत की गई इस कार्रवाई के बाद अब इन संपत्तियों की नीलामी की जाएगी जिससे ठगी का शिकार हुए एक लाख से अधिक पीड़ितों का पैसा लौटाया जा सके।
सीबीआई की देहरादून शाखा इस पूरे नेक्सस को ध्वस्त करने के लिए दैनिक आधार पर जांच की समीक्षा कर रही है। उत्तराखंड के बड्स नोडल अफसर के समन्वय से प्रदेश के भीतर मौजूद 6 संपत्तियों को कुर्क कराया गया है।
इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश की विशेष बड्स ऐक्ट अदालत की अनुमति के बाद पड़ोसी राज्य में 16 अन्य संपत्तियों पर जब्ती की सील लगाई गई। मुंबई स्थित एक कीमती प्रॉपर्टी को भी महाराष्ट्र की संबंधित अदालत से मंजूरी हासिल कर पूरी तरह जब्त कर लिया गया।
सीबीआई के रडार पर आरोपियों की कई अन्य छिपी हुई बेनामी संपत्तियां हैं जिनकी धरपकड़ के लिए अलग-अलग टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी को दबोचने में कामयाबी नहीं मिल सकी है क्योंकि यह जोड़ा सीबीआई को केस ट्रांसफर होने से पहले ही देश छोड़कर विदेश भाग निकला था।
जांच एजेंसी ने पिछले साल 26 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट के आदेश पर इस केस की कमान संभाली थी जिसके बाद कड़ियां जुड़नी शुरू हुईं।
कड़े सबूत जुटाने के बाद सीबीआई ने इस साल 13 मई 2026 को शुरुआती पांच आरोपियों को दबोचा था। इसके ठीक 28 दिन बाद जाल बिछाकर मुंबई से दो और शातिर आरोपी जांच एजेंसी के हत्थे चढ़े। अब तक इस पूरे प्रकरण में कुल सात गिरफ्तारियां हो चुकी हैं लेकिन मुख्य प्रमोटर दंपत्ति की तलाश में लुकआउट नोटिस और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ियां खंगाली जा रही हैं।
साल 2021 में इस पूरे फर्जीवाड़े की नींव पड़ी थी जब लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) ने उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार सहित आठ पहाड़ी और मैदानी जिलों में अपनी 35 आलीशान ब्रांचेज खोल दी थीं। स्थानीय स्तर पर भारी-भरकम कमीशन का लालच देकर एजेंट नियुक्त किए गए। इन एजेंटों के जरिए आम जनता को सरकारी और प्राइवेट बैंकों से कई गुना ज्यादा ब्याज दर देने का झांसा दिया गया।
मोटे मुनाफे के जाल में फंसकर उत्तराखंड के करीब एक लाख लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) के रूप में कंपनी के खातों में झोंक दी।
करोड़ों रुपये का फंड इकट्ठा होते ही वर्ष 2023-24 के दरमियान प्रमोटर्स रातोंरात दफ्तरों में ताला जड़कर चंपत हो गए। इसके बाद कुमांऊ और गढ़वाल के थानों में हड़कंप मच गया और धोखेबाज संचालकों के खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मुकदमे ठोक दिए गए।
सीबीआई ने अपनी तफ्तीश का दायरा बढ़ाते हुए राज्य पुलिस की ओर से पौड़ी गढ़वाल, देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में दर्ज 18 अलग-अलग एफआईआर को एक साथ मर्ज करके सिंगल केस डायरी तैयार की है।
मुकदमे में आईपीसी की संगीन धाराओं के साथ आपराधिक साजिश और बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स ऐक्ट (बड्स) की कठोर धाराएं लगाई गई हैं। आने वाले दिनों में कुछ और सफेदपोशों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।









