देहरादून, 26 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।
Electricity Bill : उत्तराखंड के शहरों में रात के वक्त चमकने वाली स्ट्रीट लाइटों का भारी-भरकम खर्च अब सीधे आम जनता की जेब से वसूलने की तैयारी कर ली गई है। शहरी विकास विभाग ने अपनी लड़खड़ाती माली हालत का ठीकरा उपभोक्ताओं के सिर फोड़ने का पूरा मन बना लिया है।
बिजली के कुल बिल पर दो प्रतिशत अतिरिक्त उपकर लगाने का एक नया प्रस्ताव तैयार करके ऊर्जा विभाग को भेजा गया है। प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने इस बात की पुष्टि की है कि सचिवालय में इस अजीबोगरीब प्रस्ताव को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता उनके द्वारा की गई है।
अधिकारी अब इस पूरे मामले के नफा-नुकसान और जनता पर पड़ने वाले इसके असर का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। असल में राज्य के भीतर मौजूद तमाम नगर निकाय अपने खुद के आर्थिक संसाधन बढ़ाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। शहरों से हाउस टैक्स की शत-प्रतिशत वसूली नहीं हो पा रही है।
विज्ञापनों से होने वाली टैक्स की कमाई के मामले में भी निकायों का प्रदर्शन बेहद फिसड्डी रहा है। अपनी इसी सुस्ती और नाकामी को छुपाने के लिए अब आम बिजली उपभोक्ताओं के ऊपर दो प्रतिशत बिजली उपकर का नया आर्थिक बोझ डालने की पुरज़ोर सिफारिश की गई है।
वर्तमान में राज्य के बिजली बिलों में पहले से ही वाटर टैक्स, सेस, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी चार्ज जैसी लंबी फेहरिस्त शामिल है। इसके ऊपर से फ्यूल पावर परचेज कास्ट एडजस्टमेंट चार्ज और एडिशनल सिक्योरिटी चार्ज भी हर महीने वसूला जाता है। औद्योगिक बिजली कनेक्शनों पर तो ओपन एक्सेस चार्ज और क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज का अलग ही हथौड़ा चलता है।
यही वजह है कि स्ट्रीट लाइट के नाम पर नया टैक्स ठोकने के इस प्रस्ताव से खुद ऊर्जा विभाग के भीतर के कई अधिकारी पूरी तरह असहमत दिखाई दे रहे हैं।
फ्लैट खरीदारों को बिल्डरों से मिली बड़ी आज़ादी
राज्य के भीतर बहुमंजिला इमारतों और फ्लैटों में रहने वाले लोगों के लिए विद्युत लोकपाल ने एक बेहद ऐतिहासिक और राहत देने वाला फैसला सुनाया है। अब कोई भी बिल्डर फ्लैट मालिकों से अपनी मर्जी के मुताबिक मनमाना बिजली बिल वसूल नहीं कर पाएगा।
उपभोक्ता अब सीधे उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड से अपना नया और स्वतंत्र घरेलू कनेक्शन ले सकेगा। अभी तक का ढर्रा यह था कि बिल्डर यूपीसीएल से एक सिंगल बल्क पॉइंट कनेक्शन ले लेते थे और अंदर रहने वाले परिवारों को अपनी शर्तों पर बिजली बेचते थे।
देहरादून की पैसिफिक एस्टेट रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी की रहने वाली अवनि शर्मा ने इस तानाशाही के खिलाफ विद्युत लोकपाल का दरवाज़ा खटखटाया था। यूपीसीएल के अफसर इस मामले में हीलाहवाली कर रहे थे और उनका अजीब तर्क था कि पहले पूरी सोसायटी के 51 प्रतिशत लोगों के दस्तखत और सहमति लेकर आओ।
लोकपाल डीपी गैरोला ने इस पूरे मामले की गंभीरता से सुनवाई करते हुए यूपीसीएल के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने साफ आदेश दिया कि अवनि शर्मा के फ्लैट के लिए तत्काल प्रभाव से एक स्वतंत्र घरेलू बिजली कनेक्शन जारी किया जाए।
लोकपाल ने स्पष्ट किया कि 51 फीसदी सहमति का नियम सिर्फ उन मामलों में लागू होता है जहां पूरी सोसायटी सामूहिक रूप से अपने पूरे बिजली सिस्टम को बदलना चाहती है। किसी एक व्यक्ति के निजी हक को इस नियम की आड़ में कतई नहीं रोका जा सकता। उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल जिले ऐसे इलाके हैं जहां बिल्डरों द्वारा बिजली कनेक्शनों को लेकर सबसे ज्यादा मनमानी और धांधली की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।
हरिद्वार का 10 साल पुराना बिजली विवाद और मौजूदा दरें
विद्युत लोकपाल के सामने हरिद्वार के शंतारशाह इलाके के रहने वाले तेजपाल सिंह सैनी का भी एक दिलचस्प मामला पहुंचा था। तेजपाल पिछले दस सालों से अपने नलकूप का ₹1.99 लाख का बिजली बिल दबाकर बैठे थे और इसे रद्द कराने की गुहार लगा रहे थे।
उपभोक्ता का दावा था कि उनकी माता सोमी देवी के नाम पर यह कनेक्शन विभाग ने 7 जुलाई 2012 को चालू किया था लेकिन विभाग उनसे साल 2007 से ही बिल मांग रहा है। यूपीसीएल ने अदालत के सामने पुख्ता सबूत पेश कर दिए कि सोमी देवी ने साल 2007 में ही नलकूप का कनेक्शन ले लिया था।
सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि सोमी देवी का निधन साल 2009 में ही हो चुका था। लोकपाल ने इस पर सख्त टिप्पणी की कि जब महिला की मौत 2009 में हो गई थी तो विभाग उनके नाम पर 2012 में नया कनेक्शन कैसे दे सकता था।
उपभोक्ता खुद यह मान चुका था कि मां की मौत के बाद उसने नाम ट्रांसफर की अर्जी दी थी जिससे साफ हो गया कि कनेक्शन पुराना था। लोकपाल ने तेजपाल की बिल माफी की अपील को पूरी तरह खारिज करते हुए यूपीसीएल को तत्काल पूरी रकम वसूलने के आदेश जारी कर दिए हैं।
उत्तराखंड के भीतर अगर मौजूदा बिजली दरों के गणित को समझें तो बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए यह दर ₹1.85 प्रति यूनिट तय है। आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए शुरुआती 100 यूनिट तक की खपत पर ₹3.65 प्रति यूनिट वसूला जाता है। इसके बाद 101 से 200 यूनिट तक का स्लैब ₹5.25 प्रति यूनिट का है।
भारी खपत वाले परिवारों के लिए 201 से 400 यूनिट तक ₹7.15 प्रति यूनिट और यदि खपत 400 यूनिट की सीमा को पार कर जाती है तो ₹7.80 प्रति यूनिट की सबसे महंगी दर से बिल चुकाना पड़ता है।









