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Uttarakhand Crime : ढाई साल बाद पीड़िता को मिला इंसाफ, चंपावत गैंगरेप के तीनों दोषियों को 20 वर्ष का कठोर कारावास

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चंपावत, 28 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand Crime : चंपावत जिला एवं सत्र न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के तीन दोषियों को 20-20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। जज अनुज कुमार संगल की अदालत ने शनिवार को इस बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाया। तीनों दोषियों पर 75-75 हजार रुपये का भारी भरकम अर्थदंड भी लगा है।

जुर्माना राशि अदा नहीं करने पर दोषियों की मुश्किलें और बढ़ेंगी। कोर्ट ने साफ आदेश दिया है कि अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में तीनों को एक-एक साल की अतिरिक्त कठोर सजा काटनी होगी। झालाकुड़ी निवासी सोहन सिंह (22 वर्ष), राहुल सिंह (25 वर्ष) और बबलू सिंह (32 वर्ष) को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया था। अदालत का आदेश आते ही पुलिस ने तीनों को सीधे हवालात भेज दिया।

यह वारदात करीब ढाई साल पहले 7 अक्टूबर 2023 की रात अंजाम दी गई थी। चंपावत के एक गांव में महिला को बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। पीड़िता ने घटना के तुरंत बाद कोतवाली पहुंचकर पुलिस को नामजद तहरीर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी थी।

कोतवाली पुलिस की विवेचना पूरी होने के बाद न्यायालय में पुख्ता साक्ष्यों के साथ आरोपपत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह पेश किए। मेडिकल रिपोर्ट और मौके से जुटाए गए दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए। लंबी जिरह के बाद न्यायालय ने तीनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 डी के तहत दोषी करार दिया।

सोहन सिंह और राहुल सिंह को IPC की धारा 342 के तहत भी एक-एक साल के कठोर कारावास की सजा मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। कोर्ट ने सोहन और राहुल को आईपीसी की धारा 363 (अपहरण) के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। देश में नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद अब पुरानी आईपीसी की धारा 363 की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137 ने ले ली है।

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