देहरादून, 30 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।
Dehradun Fire Audit : देहरादून अग्निशमन विभाग ने शहर के 135 प्रतिष्ठानों को अगले 15 दिन के भीतर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था सुधारने का कड़ा अल्टीमेटम थमा दिया है। सीएफओ अभिनव त्यागी की अगुवाई में हुई इस कार्रवाई से शिक्षा के हब में हड़कंप मच गया है। तय सीमा में कमियां दूर न होने पर महकमा सीधे विधिक कार्रवाई करेगा। फायर ब्रिगेड की टीमों ने पिछले 28 दिनों से पूरे जिले में एक सघन और विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान छेड़ रखा है।
टीमें लगातार अलग-अलग कमर्शियल इलाकों में दबिश दे रही हैं। इस धरपकड़ के दौरान अब तक 315 प्रतिष्ठानों का कोना-कोना छाना गया। चेकिंग टीमों ने बेसमेंट से लेकर छतों तक का मुआयना किया। 135 जगहों पर सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी पकड़ी गई। विभाग ने बिना कोई मोहलत दिए फौरन इन सभी को नोटिस थमा दिए।
देहरादून को देशभर में एक बड़े एजुकेशन हब के तौर पर जाना जाता है। हर साल हजारों की तादाद में छात्र यहां बड़े सपने लेकर आते हैं। गली-मोहल्लों में खुले सैकड़ों कोचिंग सेंटर्स छात्रों से मोटी फीस तो वसूल रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के नाम पर पूरी तरह लापरवाह हैं। सबसे खौफनाक तस्वीर इन्हीं कोचिंग संस्थानों से सामने आई है।
ऑडिट किए गए कुल 60 कोचिंग सेंटर्स में से 55 की हालत बेहद खतरनाक स्तर पर पाई गई। इन बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने वाले उपकरण या तो पर्याप्त संख्या में लगाए ही नहीं गए थे या पूरी तरह कबाड़ में तब्दील हो चुके थे। अग्निशमन सिलेंडरों की लंबे समय से सर्विसिंग नहीं हुई।
कई नामी संस्थानों में आपातकालीन निकास मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध मिले। सीढ़ियों पर भारी सामान डंप था। छत पर जाने वाले लोहे के दरवाजे बंद पड़े थे। फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन संकेतक और सुरक्षा से जुड़े अन्य बुनियादी इंतजाम भी मौके से नदारद थे।
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सीएफओ अभिनव त्यागी ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि कई संस्थानों ने तीन साल की लंबी फायर एनओसी तो हासिल कर रखी है लेकिन उपकरणों का कोई मेंटेनेंस नहीं कराया। एनओसी मिलने के बाद संचालकों ने सुरक्षा को ताक पर रख दिया। विभाग हर छोटी-बड़ी बिल्डिंग की बारीकी से जांच कर रहा है। आग कहीं भी और कभी भी लग सकती है।
अभियान के दौरान टीमों ने अपना दायरा सिर्फ शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रखा है। अब तक जांचे गए 315 प्रतिष्ठानों के आंकड़ों में 122 होटल, 48 रेस्टोरेंट और 16 होमस्टे भी शामिल हैं। पर्यटन सीजन के बीच इन कमर्शियल इमारतों में भी फायर सेफ्टी के नाम पर भारी लापरवाही पकड़ी गई है। कहीं स्मोक डिटेक्टर काम नहीं कर रहे थे तो कहीं पानी की लाइनें सूखी पड़ी थीं।
सभी डिफॉल्टर संचालकों को सकारात्मक कार्रवाई के लिए सिर्फ पंद्रह दिन का वक्त दिया गया है। समयसीमा बीतने के बाद फायर इंस्पेक्टर दोबारा औचक निरीक्षण करेंगे। मानकों को पूरा न करने वाली इमारतों को सील करने की संस्तुति सीधे जिला प्रशासन को भेजी जाएगी। जानमाल की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।









