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Badrinath Donation Theft : बदरीनाथ दान चोरी मामले में उलझे बीजेपी और कांग्रेस, छिड़ी बहस

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देहरादून, 11 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

Badrinath Donation Theft : बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) में नियुक्तियों और दान चोरी प्रकरण को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर बेहद तेज हो गया है। भाजपा ने पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष और वर्तमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को कटघरे में खड़ा किया है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि चंदा चोरी प्रकरण में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के जिस वैयक्तिक सहायक को निलंबित किया गया है, उसे गणेश गोदियाल के कार्यकाल में पक्का किया गया था। गोदियाल साल 2012 से 2017 तक समिति के अध्यक्ष पद पर तैनात थे।

यह कर्मचारी साल 2014 में सेवा में स्थायी किया गया था। विनोद चमोली का तर्क है कि जब नियुक्ति और नियमितीकरण गोदियाल के समय हुआ, तो इस गड़बड़ी की पहली नैतिक जिम्मेदारी भी उन्हीं की बनती है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को जनता से इस कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए।

धार्मिक स्थलों की मर्यादा को लेकर वर्तमान सरकार बेहद संवेदनशील रुख अपना रही है। मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। चमोली ने स्पष्ट किया कि जब पूरी जांच आगे बढ़ेगी तो निश्चित तौर पर गणेश गोदियाल का कार्यकाल भी इस जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा।

चोर साबित हुए कर्मचारी को व्यवस्था का हिस्सा बनाने के फैसले पर कांग्रेस को जवाब देना होगा। भाजपा प्रवक्ता के इस तीखे बयान के सामने आते ही कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ गई। पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए तुरंत पलटवार किया।

गणेश गोदियाल ने सफाई दी कि उनके कार्यकाल में जितने भी कर्मचारियों को स्थायी किया गया, वह पूरी प्रक्रिया निर्धारित नीतियों और तय नियमों के आधार पर पूरी हुई थी। इसमें किसी भी स्तर पर ‘पिक एंड चूज’ यानी भाई-भतीजावाद की नीति को बिल्कुल नहीं अपनाया गया था।

समिति में कई-कई सालों से संविदा और दैनिक आधार पर काम कर रहे कर्मियों के भविष्य को देखते हुए एक पारदर्शी नीति बनाई गई थी। उसी नीति के तहत पुराने हकदार कर्मचारियों को परमानेंट करने का फैसला लिया गया था।

विनोद चमोली के माफी मांगने वाले बयान को हास्यास्पद करार देते हुए गोदियाल ने तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति स्मार्ट सिटी मामले में दोषी पाया जाता है, तो क्या इसका मतलब यह निकाला जाएगा कि उस व्यक्ति के माता-पिता उसकी पैदाइश के लिए समाज से माफी मांगते फिरें।

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