Navratri Vastu Tips : नवरात्रि केवल भक्ति का पर्व ही नहीं, बल्कि घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाने का भी विशेष समय है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इस दौरान घर की सजावट और पूजा सही दिशा में की जाए तो माता रानी का आशीर्वाद कई गुना बढ़ जाता है।
स्वच्छता से आती है शुभ ऊर्जा
नवरात्रि शुरू होने से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करना बेहद जरूरी है। पुराने और टूटे-फूटे सामान को घर से बाहर करें और फर्श पर गंगाजल का छिड़काव करें।
खासकर रसोई और पूजा कक्ष को साफ-सुथरा रखें। स्वच्छ घर हमेशा माता की कृपा और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
कलश स्थापना की सही दिशा
वास्तु के अनुसार कलश स्थापना उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में करनी चाहिए। पीतल या तांबे के बर्तन में गंगाजल, सुपारी और आम के पत्ते डालकर कलश रखें।
कलश को माता की प्रतिमा के सामने स्थापित करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
पूजा कक्ष की दिशा और व्यवस्था
नवरात्रि में पूजा कक्ष को उत्तर-पूर्व दिशा में बनाना शुभ माना गया है। माता की मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए।
पूजा स्थल पर अव्यवस्था न रखें और रोजाना दीपक तथा धूपबत्ती जलाएं। इससे आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है और घर में शांति बनी रहती है।
दीपक जलाने का महत्व
दीपक हमेशा दक्षिण-पूर्व यानी अग्नि कोण में जलाना चाहिए। यह अग्नि तत्व को संतुलित करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है।
घी या तिल के तेल का दीपक माता के सामने जलाएं और ध्यान रखें कि दीपक रात में बुझने न पाए।
मुख्य द्वार की सजावट
नवरात्रि में घर के मुख्य द्वार को आम के पत्तों के तोरण और स्वास्तिक से सजाना बेहद शुभ माना जाता है।
दरवाजे पर लाल या पीले रंग का स्वास्तिक बनाएं और फूलों की माला लगाएं। यह माता रानी का स्वागत करता है और घर में सुख-समृद्धि को आकर्षित करता है।
शुभ रंगों का उपयोग
नवरात्रि में लाल, पीला और नारंगी जैसे शुभ रंगों का प्रयोग घर और पूजा स्थल में करना चाहिए। ये रंग न केवल वातावरण को पवित्र बनाते हैं बल्कि सूर्य और गुरु ग्रह से जुड़कर सकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं।
फूलों और रंगीन कपड़ों से सजावट करने पर घर का माहौल और भी मंगलमय बन जाता है। शारदीय नवरात्रि में घर की स्वच्छता, पूजा कक्ष की सही दिशा, कलश स्थापना, दीपक और मुख्य द्वार की सजावट जैसे छोटे-छोटे वास्तु उपाय बड़े परिणाम दे सकते हैं।
इनसे घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।









