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Silkyara Tunnel : उत्तरकाशी की सिल्क्यारा टनल में फिर बड़ा हादसा, कंक्रीट ब्लॉक गिरने से 21 वर्षीय मजदूर की दर्दनाक मौत

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उत्तरकाशी, 16 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

Silkyara Tunnel : उत्तरकाशी जिले में स्थित सिल्क्यारा टनल के अंदर बुधवार-गुरुवार की रात अचानक कंक्रीट की लाइनिंग का एक भारी ब्लॉक भरभराकर टूट गया। इस भारी मलबे की चपेट में आने से झारखंड के रहने वाले एक 21 वर्षीय मजदूर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

आपदा प्रबंधन केंद्र उत्तरकाशी के प्रभारी शार्दूल गुसांई ने आज सुबह हादसे से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी साझा की। रात लगभग 2 बजे टनल के भीतर यह दुर्घटना घटी है। बड़कोट साइड से लगभग 900 मीटर अंदर यह कंक्रीट ब्लॉक गिरा है।

निर्माण कार्य में लगी एजेंसी एनएचआईडीसीएल (NHIDCL) की टीम तुरंत हरकत में आई है। संस्था द्वारा घटना की तकनीकी और विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए एक तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। आधिकारिक पुष्टि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही होगी।

तीन साल पहले 12 नवंबर 2023 की सुबह भी इसी निर्माणाधीन सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग में एक बड़ा भूस्खलन हुआ था। सुरंग का एक हिस्सा अचानक ढहने से अंदर काम कर रहे 41 मजदूर फंस गए थे।

यह महत्वपूर्ण सुरंग चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना का एक प्रमुख हिस्सा है। इस टनल के निर्माण का मुख्य उद्देश्य यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के बीच यात्रियों की आवाजाही को सुगम और सुरक्षित बनाना है।

नवंबर 2023 के उस हादसे में टनल का रास्ता मलबे से पूरी तरह ब्लॉक हो गया था। सभी 41 मजदूर करीब 60 मीटर भारी मलबे के पीछे कैद हो गए थे। शुरुआती दिनों में रेस्क्यू टीमों ने पाइप के जरिए अंदर फंसे लोगों तक ऑक्सीजन, पानी, खाना और जरूरी दवाइयां पहुंचाई थीं।

टनल में फंसे मजदूरों की मानसिक स्थिति बनाए रखने के लिए संचार बहुत जरूरी था। वायरलेस सेट और पाइपलाइन के माध्यम से अंदर और बाहर की टीमों ने लगातार एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखा।

इस जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने मोर्चा संभाला था। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, बीआरओ और एनएचआईडीसीएल जैसी कई एजेंसियों ने दिन-रात एक कर दिया था।

मलबे को भेदने के लिए अमेरिकी ऑगर मशीन को मैदान में उतारा गया था। भारी चट्टानों से टकराकर मशीन के खराब होने पर रणनीति पूरी तरह बदल दी गई। रैट-होल माइनर्स ने बेहद संकरी जगह में हाथों से मैनुअल खुदाई करके मजदूरों तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया।

17 दिनों की लंबी जद्दोजहद के बाद 28 नवंबर 2023 को सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस बचाव अभियान को भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशंस में गिना गया। सरकार ने घटना के बाद कड़े आदेश जारी किए और भविष्य में निर्माणाधीन सुरंगों के भीतर सुरक्षा मानकों, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन व्यवस्थाओं को सख्त करने पर विशेष जोर दिया।

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