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Uttarakhand ESMA : उत्तराखंड में छह महीने के लिए एस्मा लागू, कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक

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देहरादून, 31 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand ESMA : उत्तराखंड में कर्मचारियों के संभावित आंदोलनों और प्रदर्शनों को रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अगले छह महीने के लिए एस्मा यानी अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम लागू कर दिया है।

कार्मिक विभाग के सचिव शैलेश बगौली की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं, जिसके तहत अब राज्यभर में किसी भी प्रकार की हड़ताल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

वर्तमान वर्ष के चुनावी माहौल को ध्यान में रखते हुए कर्मचारी संगठनों की तरफ से लगातार बड़े स्तर पर आंदोलनों की रूपरेखा तैयार की जा रही थी।

कर्मचारी संगठन आठवें वेतनमान के औपचारिक रूप से लागू होने से पहले पुरानी एसीपी व्यवस्था को बहाल किए जाने की मांग पर लगातार दबाव बनाए हुए थे।

एस्मा के इस कड़े प्रतिबंध के बीच राजधानी देहरादून में माहौल उस समय गरमा गया जब माध्यमिक सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में भारी धांधली के गंभीर आरोप लगाए गए।

कांग्रेस पार्टी के नेताओं और डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UKSSSC कार्यालय के बाहर पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए तुरंत प्रभाव से इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को रोकने की मांग की और मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया।

हंगामा बढ़ता देख आयोग ने फिलहाल शेष पदों के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को अग्रिम आदेशों तक स्थगित करने का बड़ा फैसला लिया है।

गुरुवार को चले इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई।

दूसरी ओर प्रशासनिक मोर्चे पर जनता की शिकायतों के निस्तारण में कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है।

सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन नंबर 1905 पर पिछले कुछ महीनों में दर्ज हुई शिकायतों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अफसरों की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि आम जनता की जनशिकायतों के समाधान में किसी भी स्तर पर जरा सी भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पेयजल विभाग से जुड़ी हुई सबसे अधिक शिकायतें पोर्टल पर लंबित पड़ी हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने पेयजल विभाग के अधिकारियों को अपनी कार्यशैली सुधारने के लिए ठीक सात दिनों का अल्टीमेटम दिया है।

यदि तय समय सीमा के भीतर जनशिकायतों का प्रभावी निस्तारण नहीं होता है तो जल जीवन मिशन और पेयजल विभाग के शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है।

मुख्यमंत्री ने 18 अप्रैल से लेकर 28 जुलाई के बीच सीएम हेल्पलाइन पर कुल 67 हजार 843 शिकायतों की बिंदुवार समीक्षा की और आंकड़े खंगाले।

उन्होंने निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों के स्तर पर शिकायतों के निस्तारण का प्रतिशत शून्य रहा है, उन सभी को तुरंत कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएं।

यदि इन अधिकारियों की तरफ से संतोषजनक जवाब या स्पष्टीकरण समय पर नहीं मिलता है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

इस हाई-लेवल समीक्षा बैठक में वन विभाग, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उच्च शिक्षा निदेशालय और सूचना एवं संस्कृति विभाग के पांच अफसर ऐसे पाए गए जिनकी शिकायत निस्तारण की स्थिति शून्य प्रतिशत थी।

प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को एक खास टास्क सौंपा है।

सभी अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों से उनके सेवाकाल के शुरुआती कार्यक्षेत्रों में जनसुविधाओं से जुड़े नए और व्यावहारिक नवाचारों के सुझाव मांगे गए हैं।

अधिकारियों को इन विशेष नवाचारों पर विचार करके अगले 50 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही आम जनता से जुड़े भूमि विवादों के मामलों को हर हाल में प्राथमिकता के आधार पर और तय समय सीमा में सुलझाने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को यह पाबंद किया है कि वे हर हफ्ते सोमवार के दिन अनिवार्य रूप से समाधान दिवस का आयोजन करें।

सरकारी महकमों में वर्षों से चली आ रही पुरानी और जटिल पेंशन प्रक्रियाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने दो टूक कहा कि राज्य के जो भी कर्मचारी भविष्य में सेवानिवृत्त होंगे, उनकी पेंशन प्रक्रिया में किसी भी तरह की कागजी देरी स्वीकार नहीं होगी।

सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी की पेंशन उसके रिटायरमेंट के ठीक पहले महीने से ही बैंक खाते में आ जानी चाहिए और यह पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागाध्यक्ष की होगी।

नीतिगत दावों की जमीनी हकीकत परखने के लिए मुख्यमंत्री ने खुद फोन उठाकर सीधे शिकायतकर्ताओं से बातचीत की और फीडबैक लिया।

अल्मोड़ा जिले के रहने वाले सलमान ने मुख्यमंत्री को फोन पर बताया कि उनके इलाके में कूड़ेदान और कचरे से जुड़ी बड़ी शिकायत का पूरी तरह से समाधान हो चुका है।

इसके साथ ही उन्होंने नाली निर्माण से जुड़ी एक अन्य समस्या भी रखी, जिस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से जिला मजिस्ट्रेट को कार्रवाई करने के आदेश दिए।

टिहरी गढ़वाल के आकाश ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि चंबा क्षेत्र में पानी की आपूर्ति से जुड़ी बड़ी समस्या का अब सफलतापूर्वक समाधान हो चुका है।

हरिद्वार निवासी जुल्फिकार की राजस्व विभाग से जुड़ी हुई पुरानी जटिल समस्या को भी प्राथमिकता के साथ हल करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए।

समीक्षा के दौरान एक चौंकाने वाला यह तथ्य भी सामने आया कि कई मामलों में अधिकारियों ने जनशिकायतों को पोर्टल पर गलत तरीके से बंद कर दिया था।

अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत के कारण कुल 1 लाख 19 हजार 77 शिकायतों में से 22 हजार 246 शिकायतों को गलत तरीके से बंद दिखाया गया था।

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