देहरादून, 03 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।
MDDA : मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित मुख्यालय में सोमवार, 3 अगस्त 2026 को ‘समाधान दिवस’ का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण को लेकर जारी किए गए निर्देशों के तहत इस जनसुनवाई का संचालन किया गया। प्राधिकरण में अब प्रत्येक सोमवार को इस तरह की जनसुनवाई व्यवस्था के तहत आम जनता की फाइलें और अर्जियां सीधे सुनी जा रही हैं।
सोमवार को आयोजित हुए इस समाधान दिवस में शहर और आसपास के विभिन्न इलाकों से पहुंचे करीब 15 नागरिकों ने अपनी शिकायतें, आपत्तियां और सुझाव सीधे वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखे। पहुंचे हुए लोगों ने मुख्य रूप से अवैध निर्माण, नक्शा पास कराने में आ रही रुकावटों, विकास कार्यों की सुस्त चाल, सड़कों की बदहाली, जल निकासी की गंभीर समस्याओं और जमीन से जुड़े जटिल मामलों को अधिकारियों के समक्ष विस्तार से उठाया। जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों ने मौके पर ही शिकायतों के दस्तावेज जांचे और संबंधित सेक्शन के अधिकारियों को तत्काल दिशा-निर्देश जारी किए।
इस जनसुनवाई के दौरान एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया, संयुक्त सचिव गौरव चटवाल सहित प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और अवर अभियंता टेबल पर मौजूद रहे। इंजीनियरों और प्रशासनिक अधिकारियों ने नागरिकों से सीधे बात की और कई फाइलों को मौके पर ही आगे बढ़ाकर तुरंत समाधान की प्रक्रिया शुरू कराई। कई पुराने अटके मामलों पर तुरंत संबंधित कर्मचारियों से जवाब तलब किया गया।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने इस संबंध में रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार की मंशा के अनुसार प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी, जवाबदेह और आम जनता के अनुकूल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाधान दिवस का मूल मकसद लोगों को भटकने से बचाना और एक ही छत के नीचे उनकी अर्जियों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करना है। हर एक शिकायत की अब नियमित मॉनिटरिंग होगी और काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि समाधान दिवस पर मिलने वाले हर एक पत्र और सुझाव का कानूनी प्रावधानों के तहत प्राथमिकता से समाधान कराया जा रहा है। उन्होंने फील्ड में तैनात सभी अधिकारियों और इंजीनियरों को स्पष्ट आदेश दिया कि वे शिकायत दर्ज कराने वाले नागरिकों से सीधे संपर्क में रहें। तय समयसीमा के भीतर शिकायत का निस्तारण कर आवेदक को इसकी जानकारी दी जानी आवश्यक है।









