देहरादून, 5 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।
Pushkar Singh Dhami : उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के नागरिकों के लिए एक नई स्वास्थ्य योजना ला रही है। राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की सभी प्रकार की पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांचें पूरी तरह से निशुल्क की जाएंगी। सरकार इस कदम के जरिए आम जनता तक सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 50 हजार मरीज अपना इलाज कराने पहुंचते हैं। इनमें से करीब 15 हजार मरीजों को डॉक्टरों द्वारा पैथोलॉजी या अन्य जांचें लिखी जाती हैं। मरीजों को इन जांचों के लिए वर्तमान व्यवस्था के तहत तय सरकारी शुल्क चुकाना पड़ता है। गंभीर बीमारियों की रेडियोलॉजी जांच और अन्य ब्लड टेस्ट पर मरीजों की जेब से 500 से 1000 रुपये तक खर्च हो जाते हैं।
नई व्यवस्था लागू होने पर ओपीडी में आने वाले मरीजों को यह आर्थिक बोझ बिल्कुल नहीं उठाना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस योजना का पूरा तकनीकी खाका तैयार कर लिया है। उत्तराखंड के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में 200 से अधिक प्रकार की पैथोलॉजी जांचें उपलब्ध हैं। यह सभी जांचें नई निशुल्क योजना के दायरे में कवर की जाएंगी।
उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सरकारी अस्पतालों में इन-हाउस जांच को मुफ्त करने के फैसले की पुष्टि कर दी है। उन्होंने साफ किया कि आम मरीजों को आर्थिक राहत देने के लिए विभाग यह बड़ा कदम उठा रहा है। योजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार है और जल्द ही जनता के बीच इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।
मुफ्त जांच की यह सुविधा राज्य के 5 सरकारी मेडिकल कॉलेजों, 13 जिला अस्पतालों और 95 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में एक साथ लागू की जाएगी। इस योजना का सीधा फायदा रोजाना जांच कराने वाले 15 हजार मरीजों को मिलेगा। वर्तमान समय में स्वास्थ्य विभाग ने जिला, उप जिला और कुछ सामुदायिक अस्पतालों में मुफ्त जांच के लिए निजी लैब के साथ करार किया हुआ है।
निजी लैब के काउंटर अस्पतालों के भीतर चल रहे हैं और यहां मरीजों से जांच का कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। जानकारी के अभाव में अधिकांश मरीज इन काउंटरों पर भी अपनी जांच का शुल्क जमा कराकर ही टेस्ट कराते हैं। सरकार अब पूरी प्रक्रिया को इन-हाउस कर रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हरिद्वार पहुंचे। उन्होंने यहां स्पष्ट किया कि सनातन परंपरा और संत समाज भारतीय संस्कृति का मुख्य आधार हैं। संतों के सम्मान के साथ किसी भी स्थिति में कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। धामी ने सांसद पप्पू यादव और उनके सहयोगियों पर सनातन परंपरा और संत समाज का उपहास उड़ाने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह भोलेनाथ और मां गंगा से ऐसे लोगों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व आस्था के मार्ग में जानबूझकर बाधाएं उत्पन्न करने का प्रयास करते हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा को ऐसी राजनीतिक टिप्पणियों से डिगाया नहीं जा सकता। संत समाज ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण में लगा दिया है। संतों के खिलाफ इस तरह की अपमानजनक बयानबाजी पूरी तरह से दुर्भाग्यपूर्ण है।
कांवड़ यात्रा की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यात्रा मार्गों की चौबीस घंटे निगरानी के लिए भारी संख्या में सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन तैनात किए गए हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए रूट पर एंबुलेंस की विशेष व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने कांवड़ियों से यात्रा के दौरान संयम और मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
हरिद्वार और आसपास के यात्रा मार्गों पर स्थित होटल और ढाबों में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ छिटपुट घटनाएं सामने आई हैं। अधिकांश शिव भक्त पूरी श्रद्धा और शांति के साथ अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं।
मंगलवार को मुख्यमंत्री धामी हरिद्वार के अलकनंदा घाट पर आयोजित कांवड़ियों के अभिनंदन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने वहां मौजूद पांच कांवड़ियों के ‘चरण प्रक्षालन’ की रस्म पूरी की। धामी ने अपने हाथों से शिव भक्तों को भोजन परोसा। हरकी पैड़ी और कांवड़ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के ऊपर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश कर उनका स्वागत किया गया।
कांवड़ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है। यह सेवा, अनुशासन, समर्पण और समाज में सद्भाव का एक बड़ा प्रतीक बन चुकी है। भगवान शिव श्रद्धा से चढ़ाए गए एक लोटे जल से भी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। साल 2026 की इस यात्रा में अब तक एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर जा चुके हैं।
सरकार ने कांवड़ यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं का एक बड़ा ढांचा खड़ा किया है। जगह-जगह स्थापित किए गए विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों में डॉक्टरों की टीमें लगातार काम कर रही हैं। इन अस्थाई शिविरों में अब तक 48 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का सफल प्राथमिक उपचार किया जा चुका है।









