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Rispana Encroachment : मानसून के बाद रिस्पना नदी क्षेत्र में चलेगा बुलडोजर, 324 मकानों को अंतिम नोटिस जारी

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देहरादून, 5 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

Rispana Encroachment : उत्तराखंड में एक बार फिर मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। आज 5 अगस्त 2026 को देहरादून सहित प्रदेश के 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। सुबह से ही राजधानी देहरादून के कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। इस बारिश ने आम जनजीवन को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।

देहरादून नगर निगम प्रशासन ने रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्णय लिया है। मानसून की समाप्ति के ठीक बाद एक व्यापक ध्वस्तीकरण अभियान जमीन पर उतारा जाएगा। प्रशासन की टीमें इस अभियान की रूपरेखा तैयार कर चुकी हैं।

बाढ़ क्षेत्र में अभी तक अपने घरों को न छोड़ने वाले लोगों को आखिरी चेतावनी नोटिस थमा दिया गया है। सिंचाई विभाग ने इस पूरे इलाके का तकनीकी सीमांकन किया था। सीमांकन की रिपोर्ट के आधार पर कुल 324 मकानों को अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में रखा गया है।

नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा चिन्हित इन 324 मकानों पर हर हाल में कार्रवाई होगी। कार्रवाई शुरू करने से पहले सभी प्रभावित परिवारों को अपना सामान सुरक्षित निकालने और जगह खाली करने का अंतिम अवसर दिया जा रहा है।

इन सभी प्रभावित परिवारों को एमडीडीए के किफायती आवासीय फ्लैटों में स्थानांतरित होने का विकल्प दिया गया है। नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार प्रत्येक पात्र परिवार को पुनर्वास योजना के तहत फ्लैट आवंटित किए जा चुके हैं। कई परिवारों ने अभी तक अपने नए फ्लैटों का कब्जा नहीं लिया है।

प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की शर्त साफ कर दी है। पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ही चिन्हित क्षेत्रों में भारी मशीनरी और बुलडोजर उतारे जाएंगे।

आम लोगों के मकानों से पहले सरकारी ढांचों पर नगर निगम का हथौड़ा चला है। बाढ़ क्षेत्र की जद में आ रहे एक स्कूल, एक पंचायत भवन और एक ट्यूबवेल को पूरी तरह जमींदोज किया जा चुका है। यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की गंभीरता को दर्शाती है।

नगर निगम भविष्य के लिए नए सिरे से भी सर्वे करवा रहा है। यदि इस नए सर्वे में बाढ़ क्षेत्र के भीतर कुछ अन्य मकान भी पाए जाते हैं, तो उन्हें भी ध्वस्त किया जाएगा। नए चिन्हित मकानों के निवासियों को पहले पुनर्वासित किया जाएगा और उसके बाद ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया लागू होगी।

मंगलवार सुबह देहरादून और मसूरी के विभिन्न इलाकों में करीब एक घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई। सुबह का समय होने के कारण स्कूल जाने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों को भारी जलभराव के बीच से गुजरना पड़ा। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वाले राहगीरों को सड़क पर जलभराव के कारण अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगा।

रात के समय भी देहरादून के कई इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी रहा। डीएल रोड, राजपुर रोड और ओल्ड सर्वे रोड पूरी तरह पानी में डूब गए। भूमिगत बिजली की केबल बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों ने इस जलभराव की समस्या को और अधिक भयंकर बना दिया।

खोदी गई सड़कों पर पानी भरने से हादसों का खतरा पैदा हो गया है। नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपदा कंट्रोल रूम को सक्रिय कर दिया है। कंट्रोल रूम में तैनात क्विक रिस्पॉन्स टीमों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। किसी भी आपात स्थिति में इन टीमों को घटनास्थल पर पहुंचकर तत्काल राहत कार्य शुरू करने के सीधे निर्देश दिए गए हैं।

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