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उत्तराखंड और नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच होगा एमओयू, नई दिल्ली में राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा से मिले सचिव दीपक कुमार

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नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

भारत और नेपाल के बीच संस्कृत भाषा के वैश्विक अनुसंधान को लेकर उत्तराखंड ने एक बड़ी पहल की है। प्रदेश के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास पहुंचकर नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा से सीधी मुलाकात की। दोनों देशों के बीच संस्कृत के बढ़ते वैश्विक महत्व और शैक्षणिक सहयोग को लेकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।

नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा ने संस्कृत के संवर्धन की इस नई मुहिम का खुला समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल की साहित्यिक परंपरा और संस्कृत विद्वत्ता का इतिहास काफी गहरा रहा है। भारतीय संस्कृत विद्वानों के सीधे मार्गदर्शन से नेपाल में संस्कृत शिक्षा और अनुसंधान को एक नई दिशा मिलेगी।

उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह लगातार संस्कृत और आधुनिक तकनीक के तालमेल पर जोर देते रहे हैं। शिक्षा सचिव ने नेपाली राजदूत को राज्यपाल के उस विजन से अवगत कराया जिसमें युवाओं के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल से संस्कृत के शुद्ध उच्चारण को आसान बनाने की रणनीति है। उत्तराखंड अब इस प्राचीन भाषा को तकनीक के सहारे वैश्विक मंच पर लोकप्रिय बनाने का जिम्मा उठा रहा है।

राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मुख्य फोकस संस्कृत साहित्य के संरक्षण पर टिका है। प्रदेश के सभी 13 जनपदों में 13 संस्कृत ग्रामों की स्थापना पूरी तरह से धरातल पर उतर चुकी है। इन गांवों में संस्कृत की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक समाज की दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा रहा है।

आगामी 28 अगस्त 2026 को प्रदेशभर में संस्कृत दिवस को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् और विभिन्न गुरुकुलों में संगोष्ठियां और जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। आधुनिक समाज में भाषा की प्रासंगिकता को लेकर आम जनता के बीच व्यापक संवाद किया जाएगा।

नेपाल ने इससे पहले जून 2025 में 19वें विश्व संस्कृत सम्मेलन की सफल मेजबानी की थी। उस वैश्विक सम्मेलन में दुनिया भर के प्रतिष्ठित संस्कृत विद्वानों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया था। उस आयोजन से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जो ऊर्जा मिली थी, अब उसे उत्तराखंड के सहयोग से संस्थागत रूप दिया जा रहा है।

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच जल्द ही एक आधिकारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया जाएगा। यह एमओयू दोनों संस्थानों के बीच सीधे शैक्षणिक आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान और छात्र सहयोग का नया रास्ता खोलेगा। सदियों से भारत और नेपाल के रिश्ते सनातन परंपराओं और एक साझा बौद्धिक विरासत पर टिके रहे हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के सहायक आचार्य और वरिष्ठ संस्कृत पत्रकार डॉ. सुनील जोशी भी इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक का हिस्सा रहे। बैठक में दोनों देशों के युवा शोधार्थियों को संयुक्त शोध परियोजनाओं और शैक्षणिक प्रकाशनों के लिए प्रेरित करने की स्पष्ट रूपरेखा तैयार की गई। युवा विद्वानों की यह सीधी भागीदारी भारत-नेपाल के कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को एक ठोस आधार देगी।

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