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IMD Dehradun Forecast : देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी, 5 दिन भूस्खलन-बाढ़ का खतरा

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देहरादून, 5 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

IMD Dehradun Forecast : भारत मौसम विज्ञान विभाग के देहरादून केंद्र ने आज शाम 6 बजे राज्य के लिए सात दिनों का गंभीर मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। उत्तराखंड के तीन प्रमुख जिलों में तुरंत प्रभाव से भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट लागू कर दिया गया है।

5 अगस्त को देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में हालात सबसे ज्यादा संवेदनशील बने हुए हैं। इन तीन जिलों के कई इलाकों में गर्जन के साथ आकाशीय बिजली गिरने और बारिश के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर की आशंका जताई गई है।

अत्यंत तीव्र बारिश का मतलब 51 से 100 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी गिरना है। इतनी भारी मात्रा में पानी गिरने से सीधे तौर पर फ्लैश फ्लड का खतरा पैदा होता है। पहाड़ी ढलानों से अचानक पानी मलबा लेकर तेजी से नीचे आ सकता है।

राज्य के शेष पर्वतीय जिलों में भी 5 अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी है। इन जगहों पर आकाशीय बिजली चमकने के साथ-साथ बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर देखे जाएंगे।

6 अगस्त 2026 को खतरे का दायरा भौगोलिक रूप से थोड़ा बदलेगा। देहरादून और बागेश्वर के साथ चमोली जिले में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। यहाँ भी गर्जन के साथ आसमान से बिजली गिरने और अत्यंत तीव्र वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है।

टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, पिथोरागढ़, चम्पावत, नैनीताल और रुद्रप्रयाग जनपदों के लिए 6 अगस्त को भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है।

मैदानी जिलों हरिद्वार और उधम सिंह नगर में बारिश से ज्यादा आकाशीय बिजली का खतरा मंडरा रहा है। इन दोनों जिलों में 6 अगस्त को गर्जन के साथ बिजली गिरने की प्रबल संभावना है।

7 और 8 अगस्त को देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी। पर्वतीय जिलों में इस दौरान बिजली चमकने और बारिश के तेज दौर जारी रहेंगे।

मैदानी इलाकों हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में बिजली गिरने का अलर्ट इन दो दिनों के लिए भी बरकरार रखा गया है।

9 अगस्त को बारिश का फोकस देहरादून, नैनीताल, पिथौरागढ़ और चम्पावत जनपदों पर रहेगा। इन क्षेत्रों में अनेक स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है।

5 और 6 अगस्त को होने वाली इस भारी बारिश के गंभीर प्रभाव मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में दिखाई देंगे। संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन और भारी चट्टान गिरने की घटनाएं होंगी।

राजमार्गों और संपर्क मार्गों पर मलबा आने से यातायात पूरी तरह ठप हो सकता है। बाढ़ और चट्टान खिसकने की वजह से कुछ जगहों पर सड़कों और पुलों के पूरी तरह बह जाने का सीधा खतरा मंडरा रहा है।

संपर्क टूटने के कारण दूरस्थ गांवों में आवश्यक सामग्री की आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था कई दिनों तक प्रभावित रह सकती है।

बिजली और पानी जैसी सामुदायिक सेवाएं भी इस प्राकृतिक आपदा के कारण लंबे समय तक बाधित होंगी। कच्चे मकानों, दीवारों, झोपड़ियों और निर्माणाधीन भवनों को भारी नुकसान पहुँच सकता है।

लगातार बारिश के कारण नदियों और उनकी सहायक नदियों के जल स्तर में मध्यम से तीव्र वृद्धि दर्ज की जाएगी। बांधों और बैराजों में पानी भरने से वहाँ से भारी मात्रा में अतिरिक्त जल छोड़ा जाएगा।

अतिरिक्त जल छोड़े जाने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अचानक बाढ़ का संकट खड़ा हो जाएगा।

ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में पिघलने वाली बर्फ पर जब यह भारी बारिश गिरेगी, तो नालों और बरसाती नदियों का जल प्रवाह अचानक बढ़ जाएगा। इससे नदी किनारों पर भारी कटाव और विनाशकारी फ्लैश बाढ़ की स्थिति पैदा होगी।

मौसम विभाग ने चारधाम यात्रा कर रहे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए सख्त सलाह जारी की है। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ही रुके रहने और अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा करने को कहा गया है।

खड़ी ढलानों और सक्रिय भूस्खलन वाले क्षेत्रों को पार करने की कोशिश सख्त मना है। पर्वतारोहण के सभी अभियानों को तुरंत रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

पर्वतारोहियों और अभियान के सदस्यों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों पर लौटने की सलाह दी गई है।

नदी, नालों और निचले इलाकों के पास बसी बस्तियों को हर समय अलर्ट मोड पर रहना होगा। बांध, बैराज और जल विद्युत संयंत्रों के प्रबंधन और नियंत्रण अधिकारियों को एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

दूर-दराज के क्षेत्रों में तैनात सैन्य और अर्ध-सैन्य बलों की चौकियों को भी अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के प्रति सतर्क कर दिया गया है।

भारी वर्षा की इस पूरी अवधि में मकानों, पुलों, बांधों और सुरंगों के निर्माण कार्यों को पूरी तरह रोकने की सलाह दी गई है।

किसानों को खेतों में भरे अतिरिक्त पानी की निकासी की तुरंत व्यवस्था करने को कहा गया है। खेतों में मौजूद कटी हुई उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

आकाशीय बिजली गिरने के समय लोगों को घरों के अंदर ही रहना होगा और खिड़की-दरवाजे बंद रखने होंगे। जानवरों को खुले में न बांधने और पेड़ के नीचे भूलकर भी शरण न लेने की सख्त हिदायत दी गई है।

गर्जन के दौरान बिजली का संचालन करने वाली सभी धातु की वस्तुओं से दूर रहने की सलाह दी गई है।

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