देहरादून, 7 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।
Uttarakhand Weather : उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश ने पूरे राज्य का जनजीवन पूरी तरह से ठप कर दिया है। पहाड़ों में लगातार हो रहे भूस्खलन और उफनते गदेरों ने राष्ट्रीय राजमार्गों को मलबे से पाट दिया है। प्रदेशभर में 147 से अधिक सड़कें आवाजाही के लिए बंद पड़ी हैं। यात्री और स्थानीय लोग रास्तों में फंसे हुए हैं।
मौसम विभाग ने आज शुक्रवार को देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पर्वतीय क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और यात्रियों को अनावश्यक यात्रा से बचने के सख्त निर्देश दिए हैं।
रुद्रप्रयाग जिले के तिलवाड़ा में गुरुवार तड़के गीड़-भुतेर गदेरा अचानक उफान पर आ गया। गदेरे का भारी मलबा सीधे नगर के रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में घुस गया। मलबे की चपेट में आने से चार बाइकें, दो कूड़ा वाहन और एक ट्रैक्टर पूरी तरह से दब गए।
लोक निर्माण विभाग की टीम ने सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह साढ़े ग्यारह बजे केदारनाथ हाईवे पर यातायात सुचारू किया। दोपहर दो बजे पहाड़ी से दोबारा भारी मलबा सड़क पर आ गिरा। केदारनाथ हाईवे एक बार फिर पूरी तरह से बंद हो गया।
सैकड़ों कांवड़ यात्री और वाहन हाईवे के दोनों तरफ फंसे हुए हैं। विजयनगर-तैला मार्ग पर हुए बड़े भूस्खलन ने 80 से अधिक गांवों का मुख्यालय से सीधा संपर्क काट दिया है।
पिथौरागढ़ में धारचूला-गुंजी नेशनल हाईवे पर मलघाट के पास भारी भूस्खलन हुआ है। पहाड़ी दरकने से मानसरोवर यात्रा मार्ग 10 घंटे से अधिक समय से पूरी तरह से ठप पड़ा है। सड़क पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं।
कैलास मानसरोवर यात्रा के नौवें दल को आज शुक्रवार को धारचूला से गुंजी के लिए रवाना होना है। सड़क मार्ग न खुलने से इन यात्रियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन की मशीनें मलबा हटाने में जुटी हैं।
चमोली जिले में बदरीनाथ हाईवे समेत 32 ग्रामीण सड़कें बंद हैं। इन रास्तों के बंद होने से 10 हजार से अधिक ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
निजमूला घाटी के ईरानी गांव के पूर्व प्रधान मोहन सिंह और ग्रामीण रणवीर सिंह ने विरही-निजमूला सड़क की जर्जर स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सड़क बार-बार बाधित हो रही है। 14 गांवों के ग्रामीणों का राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं का संकट गहरा गया है।
उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर रुक-रुक कर पहाड़ से बोल्डर और मलबा गिर रहा है। इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बेहद जोखिम भरी हो गई है।
पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश का सीधा असर मैदानी क्षेत्रों की नदियों पर पड़ा है। हरिद्वार में भीमगोड़ा बैराज पर गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान 293 मीटर को पार कर 293.30 मीटर पर पहुंच गया है।
जलस्तर बढ़ने के बाद बैराज से 1.65 लाख क्यूसेक पानी निचले इलाकों की ओर छोड़ा गया है। ऋषिकेश में गंगा बैराज के सभी 15 गेट खोल दिए गए हैं।
चीला जल विद्युत गृह पर जलस्तर का सीधा असर पड़ा है। यहां 144 मेगावाट बिजली का उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है। हरिद्वार और रुड़की के कई रिहायशी इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है।
पर्यटन नगरी मसूरी और देहरादून में गुरुवार सुबह से ही मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहा। मसूरी के माल रोड पर दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और पर्यटन व्यवसाय पर इसका बुरा असर पड़ा।
लगातार हो रही बारिश ने सब्जियों की आपूर्ति चेन को भी तोड़ दिया है। देहरादून की निरंजनपुर मंडी में आम दिनों की तुलना में सब्जियों का उठान बेहद कम मात्रा में हुआ।
खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है। पिथौरागढ़ के नैनीसैनी एयरपोर्ट से संचालित होने वाली 42 सीटर विमान सेवा पूरी तरह से बाधित रही। दिल्ली से पिथौरागढ़ आने वाला विमान उड़ान नहीं भर सका।
देहरादून से पिथौरागढ़ की हवाई सेवा भी मौसम की भेंट चढ़ गई। एयरपोर्ट के निदेशक संदीप यादव ने बताया कि विजिबिलिटी और खराब मौसम के कारण उड़ानों के संचालन में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं।









