उत्तरकाशी, 13 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।
उत्तरकाशी जिले की रंवाई घाटी में किसानों की सुविधा के लिए 10 करोड़ रुपये की लागत से एक नई कृषि उत्पादन मंडी समिति का निर्माण किया गया था। धारी वल्ली में बनी यह अत्याधुनिक इमारत सिर्फ एक शोपीस बनकर खड़ी है। इसका संचालन आज तक शुरू नहीं हो पाया। क्षेत्र के काश्तकार अपनी फसलें बेचने के लिए बाहरी मंडियों पर निर्भर हैं। स्थानीय स्तर पर उपज की बिक्री की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
रंवाई घाटी पूरे उत्तराखंड में अपनी नकदी फसलों के लिए जानी जाती है। यहां टमाटर का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। शिमला मिर्च, राजमा और अन्य सब्जियों की भी भारी पैदावार होती है। हर साल की तरह इस बार भी उपज अच्छी हुई है। मंडी का ताला बंद होने से किसान अपना सारा माल सड़क किनारे इकट्ठा कर रहे हैं। उन्हें अपनी ही उपज के साथ ट्रकों का इंतजार करना पड़ता है।
माल को ट्रकों में लोड करवाने में ही पूरा दिन बीत जाता है। कई बार वाहन समय पर नहीं पहुंचते। किसानों को सड़क पर बैठकर अपनी फसल की चौकीदारी करनी पड़ती है। उनका बहुमूल्य समय खेतों के बजाय सड़क किनारे पहरा देने में बर्बाद हो रहा है।
मंडी न होने का सीधा फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं। अधिकांश काश्तकार मजबूरी में इन्हीं बिचौलियों को फसल बेच रहे हैं। खुले बाजार का सही मूल्य किसानों के हाथ नहीं आ रहा। नौगांव की नई मंडी चालू होती तो फसल सीधे खेतों से वहां पहुंचती। व्यवस्थित तरीके से उपज को बड़े बाजारों में भेजा जा सकता था। परिवहन पर होने वाला भारी-भरकम खर्च सीधा किसानों की जेब पर असर डाल रहा है।
अगस्त का महीना चल रहा है और पहाड़ों पर बारिश का कहर जारी है। बरसात में सड़कें अक्सर बंद हो जाती हैं। उपज समय पर बाहरी मंडियों तक नहीं पहुंच पाती। रास्ते में ही टमाटर और शिमला मिर्च खराब होने लगती है। स्थानीय मंडी संचालित होती तो किसानों की फसल सुरक्षित रखने की जगह मिल जाती। विपणन की प्रक्रिया मौसम की मार से प्रभावित नहीं होती।
स्थानीय काश्तकार नयन सिंह बर्त्वाल, विजय बंधानी और हरिमोहन सिंह ने इस पूरी व्यवस्था पर कड़ा रोष जताया है। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस साल मंडी का संचालन हर हाल में शुरू हो जाएगा। ऐसा कुछ नहीं हुआ।
किसानों ने इसके लिए सीधे तौर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका स्पष्ट आरोप है कि नेताओं की कमजोर पैरवी के कारण मंडी शुरू नहीं हो सकी। करोड़ों रुपये खर्च करके बनाई गई इमारत का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। यह सरकारी संसाधनों की सीधी अनदेखी है। तैयार होने के बावजूद मंडी का इस्तेमाल न होना किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल मंडी संचालन की मांग रखी है।
कृषि उत्पादन मंडी के सचिव अजय डबराल ने इस मामले पर अपनी बात रखी। नौगांव में निर्मित कृषि उत्पादन मंडी समिति पूरी तरह से बनकर तैयार है। इसके लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा जा चुका है।
सचिव अजय डबराल ने बताया कि मुख्यमंत्री से समय मांगा गया है। वहां से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। समय मिला तो इसी महीने के अंत तक मंडी का लोकार्पण कर दिया जाएगा।
उद्घाटन होते ही मंडी का विधिवत संचालन शुरू हो जाएगा। रंवाई घाटी के हजारों किसानों को विपणन की सीधी सुविधा मिलेगी।









