दून हॉराइज़न, हल्द्वानी (16 अगस्त 2026): मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक तौर-तरीकों पर सीधा और कड़ा हमला बोला है। देवभूमि की धरती पर समाज को बांटने वाली राजनीति किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता कांग्रेस के इस विभाजनकारी व्यवहार का लोकतांत्रिक तरीके से माकूल जवाब देगी।
हल्द्वानी के चोरगलिया स्थित नंधौरगढ़ पैलेस रिजॉर्ट में भारतीय जनता पार्टी कुमाऊं मंडल के जिला अध्यक्षों और मंडल अध्यक्षों की अहम संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के रिजॉर्ट परिसर में पहुंचते ही मौजूद पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा, मैदानी चुनौतियों और सांगठनिक मजबूती को लेकर इस मंच पर सीधा संवाद हुआ।
बैठक के एजेंडे पर चर्चा शुरू करने से पहले मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान से जुड़े शुद्धिकरण विवाद पर कांग्रेस की भूमिका को आड़े हाथों लिया। हल्द्वानी रामलीला मैदान में धार्मिक उन्माद फैलाने वाले भड़काऊ नारे लगाए गए थे और वहां भारी गंदगी फैलाई गई थी। स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस उपद्रव के विरोध में पूरे परिसर का शुद्धिकरण किया।
कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम की आड़ में जाति का कार्ड खेलकर समाज के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने में जुटी है। उत्तराखंड का सामाजिक चरित्र हमेशा से समावेशी रहा है और यहां के लोग हर वर्ग को अपनाते हैं। जाति या वर्ग के आधार पर नफरत फैलाने वाले विभाजनकारी नैरेटिव को राज्य की जनता सिरे से खारिज कर चुकी है।
कांग्रेस के ऐतिहासिक ट्रैक रिकॉर्ड को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि पार्टी ने डॉ. भीमराव आंबेडकर, बाबू जगजीवन राम और सीताराम केसरी जैसे कद्दावर नेताओं के साथ कैसा अपमानजनक व्यवहार किया था। कांग्रेस का इतिहास हमेशा से अपने ही वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा और जातीय ध्रुवीकरण की नींव पर टिका रहा है। आज भी पार्टी उसी संकीर्ण मानसिकता पर आगे बढ़ रही है।
राहुल गांधी की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी भाषा और सार्वजनिक आचरण से उनकी वास्तविक सोच साफ उजागर हो जाती है। राहुल गांधी अपने गैर-जिम्मेदार सलाहकारों और चाटुकारों की बातों में आकर राजनीति कर रहे हैं। जिनकी दादी सालों-साल देश की प्रधानमंत्री रहीं और जिनकी मां ने लंबे समय तक सत्ता की बागडोर संभाली, वे आज सार्वजनिक मंचों पर फूहड़ नाटक करते हैं।
मंचों पर एक-दूसरे को जबरन गले लगाने जैसे ड्रामे यह साबित करते हैं कि इनकी नजर में महिलाओं और सार्वजनिक मर्यादाओं के प्रति क्या सोच है। कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह हताशा और घोर निराशा के भंवर में फंसा हुआ है। इसी बीमार और नकारात्मक मानसिकता की वजह से मोदी सरकार के दौर में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलने की प्रक्रिया में अड़चनें आईं और देरी हुई।









