दून हॉराइज़न, देहरादून (17 अगस्त 2026): उत्तराखंड में सत्ता की हैट्रिक लगाने के मिशन में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे का नया फॉर्मूला तय कर दिया है। संगठन ने साफ कर दिया है कि इस बार प्रत्याशियों का चयन विधायकों के रसूख के आधार पर नहीं, बल्कि मंडल और जिला अध्यक्षों की सीधी ग्राउंड रिपोर्ट पर होगा। कमजोर पकड़ और कार्यकर्ताओं की नाराजगी झेल रहे कई मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की पूरी संभावना बन गई है।
पार्टी ने टिकट वितरण के लिए तीन मुख्य पैमाने निर्धारित किए हैं। इनमें पहला पैमाना विधायक की जनता के बीच लोकप्रियता और जनाधार है। दूसरा पैमाना स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष या नाराजगी की स्थिति है। तीसरा पैमाना क्षेत्र की स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियां और सामने मौजूद मजबूत दावेदारों का समीकरण है।
संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों के पदाधिकारियों से मिलने वाले फीडबैक को ही अंतिम सूची का आधार बनाने का निर्णय लिया है। 9 अगस्त को गढ़वाल मंडल की समीक्षा के बाद कुमाऊं क्षेत्र के अध्यक्षों की विस्तृत बैठक चोरगलिया में आयोजित की गई।
बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों को बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। एसआईआर को लेकर जनता को जागरूक करने के साथ ही नए मतदाताओं को जोड़ने का अभियान तेज करने पर बल दिया गया।
वर्तमान 70 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 47 और कांग्रेस के पास 20 सीटें हैं। आंतरिक सर्वे रिपोर्टों के आधार पर पार्टी उन सीटों पर विशेष नजर रख रही है जहां जनप्रतिनिधियों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध देखा जा रहा है। पदाधिकारियों को अपने-अपने इलाकों में जनता का मूड भांपते हुए दावेदारों की वास्तविक पकड़ पर निरंतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।
संगठनात्मक समीक्षा के दौरान धारचूला, लोहाघाट, अल्मोड़ा, सल्ट और जागेश्वर विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारी को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। धारचूला और अल्मोड़ा सीटों पर पार्टी के भीतर नए और ऊर्जावान युवा चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई।
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया कि संभावित दावेदारों के चयन में मंडल और जिला अध्यक्षों की राय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। जिलों के नेतृत्व को स्थानीय जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि सरकारी योजनाओं का प्रभाव अंतिम व्यक्ति तक दिखे।
चोरगलिया में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सांसदों, विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद किया। अल्मोड़ा और नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों से एक-एक कर क्षेत्रीय विकास कार्यों और मानसून में क्षतिग्रस्त सड़कों की स्थिति पर राजनीतिक फीडबैक लिया गया।
कुमाऊं क्षेत्र के 117 मंडल अध्यक्षों और 8 जिला अध्यक्षों ने अपनी रिपोर्ट नेतृत्व के समक्ष पेश की। 2022 के विधानसभा चुनाव में कुमाऊं की कुल 29 सीटों में से भाजपा ने 18 और कांग्रेस ने 11 सीटों पर जीत हासिल की थी।
ऊधमसिंह नगर की 9 सीटों में से कांग्रेस 5 सीटों पर काबिज है जबकि भाजपा के खाते में 4 सीटें आई थीं। पार्टी का मुख्य जोर तराई की खटीमा, किच्छा, नानकमत्ता, बाजपुर और जसपुर सीटों पर अपने जनाधार को मजबूत करने पर है। नैनीताल जिले की 6 सीटों में से भाजपा के पास मौजूद 5 सीटों को सुरक्षित रखना संगठन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
रामलीला मैदान से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए पार्टी ने विकास कार्यों और सक्रिय जनसंपर्क को हथियार बनाया है। मंत्रियों और विधायकों को अपने क्षेत्रों में निरंतर प्रवास करने और जनता से सीधा संवाद बनाए रखने की हिदायत दी गई है। सुबह साढ़े दस बजे शुरू हुई यह संगठनात्मक मैराथन बैठक देर शाम तक चली, जिसके बाद मुख्यमंत्री खटीमा के लिए रवाना हो गए।









